नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के बीच लंबे समय से चल रहा वैवाहिक विवाद आखिरकार खत्म हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की आपसी सहमति से तलाक की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह को समाप्त करने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने पर भी सहमति जताई है।
बता दें कि उमर अब्दुल्ला और पायल पिछले करीब 17 वर्षों से अलग रह रहे थे। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है। इसके बाद न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने माना ‘डेड मैरिज’
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि दोनों पिछले लगभग 16 वर्षों से अलग रह रहे हैं और उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अदालत ने इसे ‘डेड मैरिज’ (Dead Marriage) की स्थिति माना था।
1994 में हुई थी उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी
रिपोर्टों के अनुसार, उमर अब्दुल्ला और पायल की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम करने के दौरान हुई थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध विकसित हुए और सितंबर 1994 में उन्होंने विवाह किया। उनके दो बेटे हैं। हालांकि वैवाहिक संबंधों में मतभेद बढ़ने के बाद दोनों 2009 से अलग रहने लगे। वर्ष 2011 में उमर अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से अलग होने की घोषणा भी की थी।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिला फैसला
उमर अब्दुल्ला ने शुरुआत में क्रूरता (Cruelty) के आधार पर तलाक की मांग की थी। हालांकि फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी और कहा कि वे क्रूरता के आरोप साबित नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला को पायल को हर महीने 1.5 लाख रुपये गुजारा भत्ता देने तथा बेटे की शिक्षा के लिए 60,000 रुपये प्रतिमाह देने का निर्देश भी दिया था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सर्वोच्च अदालत के फैसले के साथ दोनों के बीच वर्षों से लंबित वैवाहिक विवाद का औपचारिक रूप से अंत हो गया है।





