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बाघ के डर से डैम में डूबे पिता-पुत्र, दोनों की मौत, वन विभाग ने 25-25 लाख रुपये मुआवजे का किया ऐलान

में बाघ के डर से भाग रहे पिता और 7 वर्षीय बेटे की डैम में डूबने से मौत हो गई। वन विभाग ने दोनों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा और तत्काल सहायता देने की घोषणा की।

महाराष्ट्र न्यूज
परिजनों में मचा कोहराम
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

DESK: महाराष्ट्र के नागपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। बाघ के डर से जान बचाकर भाग रहे एक पिता और उनके सात वर्षीय बेटे की डैम में डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है। वन विभाग ने इस हादसे को बाघ की वजह से हुई दुर्घटना मानते हुए मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने और 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान करने की घोषणा की है।


यह हादसा नागपुर के देवलापार क्षेत्र के छावरी शिवार स्थित लखन डैम के पास हुआ। मृतकों की पहचान जीवन धर्मदास कोकोड़े और उनके सात वर्षीय बेटे जतिन जीवन कोकोड़े के रूप में हुई है। बताया जाता है कि जीवन कोकोड़े अपने बेटे जतिन और भांजे संजय उइके के साथ खेत में कृषि करने गए थे। काम के दौरान अचानक उनकी नजर करीब 80 से 100 मीटर की दूरी पर एक बाघ पर पड़ी। बाघ को देखते ही तीनों घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे।


प्रत्यक्षदर्शी संजय उइके के मुताबिक, वह डैम के निचले हिस्से की ओर भागा, जबकि जीवन अपने बेटे जतिन के साथ डैम के ऊपरी हिस्से की तरफ दौड़ने लगे। इसी दौरान अफरा-तफरी में सात वर्षीय जतिन का संतुलन बिगड़ गया और वह फिसलकर डैम के गहरे पानी में जा गिरा।


बेटे को पानी में गिरता देख पिता जीवन कोकोड़े उसे बचाने के लिए बिना देर किए डैम में कूद पड़े। उन्हें तैरना आता था, लेकिन बच्चे को बचाने की कोशिश में वे भी गहरे पानी में चले गए। पानी की अधिक गहराई के कारण दोनों बाहर नहीं निकल सके और डूबने से उनकी मौत हो गई।


घटना की सूचना मिलते ही देवलापार पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी नारायण तुरकुंडे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वन विभाग के रेंज ऑफिसर शेषराव तुले भी अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ घटनास्थल पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाकर दोनों के शव डैम से बाहर निकाले गए। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कर आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की।


25-25 लाख रुपये मुआवजे का ऐलान

वन विभाग की प्रारंभिक जांच में यह माना गया कि बाघ के दिखाई देने के बाद मची भगदड़ के कारण यह हादसा हुआ। इसी आधार पर विभाग ने पिता और पुत्र के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही तत्काल राहत के रूप में 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है।


मानव-वन्यजीव संघर्ष पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में बाघों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे खेतों में काम करने वाले किसानों और ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और लोगों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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