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LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो सिलेंडर का कोटा दोगुना

LPG Crisis India: एलपीजी संकट के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को राहत देते हुए 5 किलो गैस सिलेंडर का कोटा दोगुना किया है. साथ ही ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Apr 07, 2026, 11:36:50 AM

LPG Crisis India

प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google

LPG Crisis India: देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच केंद्र सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने शहरों में काम करने वाले मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर (छोटू सिलेंडर) का कोटा दोगुना करने का फैसला लिया है। अब रोजाना सप्लाई किए जाने वाले इन सिलेंडरों की संख्या पहले से दोगुनी होगी।


सरकार के मुताबिक, 2-3 मार्च 2026 को जितने सिलेंडर एक दिन में सप्लाई करने का लक्ष्य था, अब उससे दोगुनी संख्या में सिलेंडर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाएंगे। इन 5 किलो सिलेंडरों को एफटीएल (Free Trade LPG) सिलेंडर भी कहा जाता है, जो खास तौर पर प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए बनाए गए हैं।


दरअसल, स्थायी पते की कमी के कारण कई लोगों को नियमित गैस कनेक्शन नहीं मिल पाता। ऐसे में कोई भी व्यक्ति एक पहचान पत्र दिखाकर यह छोटा सिलेंडर आसानी से प्राप्त कर सकता है। सरकार का यह कदम उन लोगों के लिए राहत भरा है जो अस्थायी रूप से शहरों में रहकर काम करते हैं।


एलपीजी संकट की खबरों के बीच सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग भी तेजी से बढ़ने लगी थी। इसे रोकने के लिए सरकार ने पहले ही बुकिंग पर समय सीमा तय कर दी थी, ताकि एक कनेक्शन पर तय अवधि से पहले दोबारा बुकिंग न हो सके। छोटू सिलेंडर का कोटा बढ़ाने का उद्देश्य भी इसी कालाबाजारी को रोकना और जरूरतमंदों तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह नया कोटा पहले से निर्धारित 20 प्रतिशत अतिरिक्त कोटे के ऊपर होगा।


राज्य सरकारों और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें। वहीं, एक अन्य फैसले में विद्युत मंत्रालय ने इंडक्शन चूल्हों के लिए स्टार रेटिंग अनिवार्यता की तारीख को आगे बढ़ा दिया है। पहले इसे 1 जुलाई 2026 से लागू किया जाना था, लेकिन अब नई अधिसूचना के अनुसार इसे 1 जनवरी 2027 तक टाल दिया गया है। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो से परामर्श के बाद सरकार ने यह फैसला लिया है, ताकि उद्योग और उपभोक्ताओं को अतिरिक्त समय मिल सके।