Bihar News : लखीसराय के प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। इस हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हादसे की सूचना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति जताई है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में अशोकधाम की घटना को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताया। उन्होंने हादसे में श्रद्धालुओं की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत श्रद्धालुओं की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच बिगड़े हालात
सावन की तीसरी सोमवारी होने के कारण सुबह से ही अशोकधाम मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी थी। बड़ी संख्या में कांवरिया और शिवभक्त जलाभिषेक के लिए मंदिर की ओर बढ़ रहे थे। इसी दौरान बैरिकेडिंग के पास अचानक स्थिति बिगड़ गई और देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हादसे में सात श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हुई है और एक दर्जन से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बैरिकेडिंग टूटने और बिजली के पोल को लेकर फैली अफवाह के बाद लोगों में अचानक डर पैदा हुआ। कई श्रद्धालु खुद को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए तेजी से भागने लगे। भीड़ का दबाव बढ़ने के साथ ही कई लोग जमीन पर गिर पड़े और उनके ऊपर पीछे से आ रहे श्रद्धालु गिरते चले गए। देखते ही देखते वहां चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश
हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया तथा घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। लखीसराय के जिलाधिकारी ने भी मृतकों की संख्या की पुष्टि की है। गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं को बेहतर इलाज के लिए आगे रेफर किए जाने की संभावना जताई गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को घायलों के इलाज में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने का निर्देश दिया है। उन्होंने प्रशासन से राहत एवं चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिकता देने को कहा है। हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है।
पहले भी उठ चुके हैं भीड़ प्रबंधन पर सवाल
अशोकधाम में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षित आवाजाही के लिए बैरिकेडिंग तथा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। मौजूदा हादसे ने एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर क्षेत्र में पहले भी भगदड़ की घटना हो चुकी है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के इलाज और स्थिति को नियंत्रित रखने पर है। वहीं हादसे की वजह और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की भी जांच की जा रही है। अशोकधाम में पूजा और आस्था के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए यह सोमवारी खुशी के बजाय गहरे दुख और मातम में बदल गई। मुख्यमंत्री की संवेदना के साथ अब सबसे बड़ी प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता पहुंचाना है।





