DESK: सरकारी नौकरी पाने का सपना हर कोई देखता है, कहते हैं सरकारी नौकरी मिलना भगवान के मिलने के समान है। लेकिन सरकारी नौकरी सभी को नहीं मिलती, जो पढ़ाई में मेहनत करता है, उसे ही भगवान के दर्शन होते है। ऐसा ही मेहनत अब्दुल मजीद ने किया था, लेकिन उसे सरकारी नौकरी जवानी में नहीं बल्कि बुढापे में नसीब हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
केरल में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र तब मिला, जब वह नौकरी करने की उम्र पार कर चुका था। हम बात कर रहे हैं, केरल के मलप्पुरम जिले के रहने वाले 61 साल के अब्दुल मजीद की जिन्हें रिटायरमेंट की उम्र में सरकारी नौकरी का ज्वाइनिंग लेकर नसीब हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस भर्ती परीक्षा में उन्होंने हिस्सा लिया था, वह करीब 18 साल पहले आयोजित हुई थी और संबंधित मेरिट सूची भी वर्षों पहले समाप्त हो चुकी थी।
2005 में दी थी परीक्षा
अब्दुल मजीद ने वर्ष 2005 में पार्ट-टाइम जूनियर अरबी शिक्षक पद के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। परीक्षा में सफल होने के बाद उनका नाम चयन सूची में शामिल किया गया। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही नियुक्ति मिलेगी और उनका सरकारी नौकरी का सपना पूरा होगा। हालांकि, समय बीतता गया और नियुक्ति को लेकर कोई सूचना नहीं मिली। धीरे-धीरे वर्षों का इंतजार निराशा में बदल गया और आखिरकार उन्होंने सरकारी नौकरी की उम्मीद छोड़ दी।
2008 में समाप्त हो गई थी रैंक लिस्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस रैंक लिस्ट में अब्दुल मजीद का नाम शामिल था, उसकी वैधता वर्ष 2008 में ही समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद संबंधित पद लंबे समय तक खाली पड़ा रहा। कई बार उस पद को भरने की कोशिश की गई, लेकिन विभिन्न कारणों से भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। आखिरकार, वर्षों बाद पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को मजीद का नाम मिला और केरल लोक सेवा आयोग (PSC) ने उन्हें एडवाइस मेमो यानी नियुक्ति संबंधी पत्र जारी कर दिया।
सपना पूरा होने से पहले ही निकल गई उम्र
अब्दुल मजीद ने बताया कि सरकारी नौकरी पाना उनका जीवनभर का सपना था। चयन सूची में नाम आने के बाद उन्होंने लंबे समय तक नियुक्ति का इंतजार किया, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने दूसरा रास्ता चुन लिया। अब 61 वर्ष की उम्र में नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वे नौकरी ज्वाइन नहीं कर सकते, क्योंकि वे सरकारी सेवा की निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर नियुक्ति मिल जाती, तो उनका सपना पूरा हो सकता था।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे सरकारी तंत्र की सुस्ती और लापरवाही का उदाहरण बताया। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा,"जवानी में परीक्षा दी और बुढ़ापे में जॉइनिंग लेटर मिला।" वहीं, अन्य लोगों का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली ऐसी देरी लाखों युवाओं के सपनों को प्रभावित करती है। कई यूजर्स ने मांग की कि सरकारी भर्तियों को समयबद्ध बनाया जाए, ताकि उम्मीदवारों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।
आखिर 18 साल बाद कैसे मिला नियुक्ति पत्र?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस पद के लिए भर्ती होनी थी, वह लंबे समय तक रिक्त पड़ा रहा। कई प्रयासों के बावजूद उस पद पर नियुक्ति नहीं हो सकी। बाद में जब पुराने रिकॉर्ड की समीक्षा की गई तो अब्दुल मजीद का नाम सामने आया और उन्हें नियुक्ति से जुड़ा पत्र भेज दिया गया। हालांकि तकनीकी रूप से उन्हें नियुक्ति का अवसर दिया गया, लेकिन उम्र सीमा पार हो जाने के कारण यह नियुक्ति अब उनके किसी काम की नहीं रही। यह मामला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।



