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वंदे मातरम् गाने से कांग्रेस पार्षद ने किया इनकार, भाजपा पार्षदों ने सदन में किया हंगामा

इंदौर नगर निगम की बैठक में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख ने वंदे मातरम् गाने से इनकार किया, जिसके बाद भाजपा पार्षदों ने हंगामा किया। विवाद बढ़ने पर उन्हें सदन से बाहर भेजा गया।

मध्यप्रदेश न्यूज
राष्ट्र गीत का अपमान
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
2 मिनट

DESK: मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम की बजट बैठक में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख द्वारा ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार करने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस मुद्दे को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ और भाजपा पार्षदों ने नारेबाजी की।


बताया जाता है कि बैठक के दौरान फौजिया शेख ने इस्लामी मान्यताओं और संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए ‘वंदे मातरम्’ गाने से मना कर दिया। उनके इस फैसले से भाजपा पार्षद नाराज हो गए और सभापति मुन्नालाल यादव की आसंदी के पास पहुंचकर विरोध जताने लगे। स्थिति बिगड़ती देख सभापति ने उन्हें सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।


फौजिया शेख ने अपने बचाव में कहा कि उनका धर्म उन्हें ‘वंदे मातरम्’ गाने की अनुमति नहीं देता, और संविधान उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करती हैं और हमेशा करती रहेंगी।


उन्होंने आरोप लगाया कि वह बैठक में शहर की बुनियादी समस्याओं, खासकर गंदे पानी के मुद्दे पर बात करना चाहती थीं, लेकिन भाजपा पार्षदों ने जानबूझकर ध्यान भटकाने के लिए उनसे पहले ‘वंदे मातरम्’ गाने को कहा।


वहीं, इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि फौजिया शेख जानबूझकर बैठक में देर से पहुंचती हैं, ताकि उन्हें ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाना पड़े।


इस पूरे विवाद पर कांग्रेस ने खुद को अलग कर लिया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि यह फौजिया शेख की व्यक्तिगत राय है और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय के दिल में बसता है और इसे गाना सभी के लिए महत्वपूर्ण है।


गौरतलब है कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी और इसे 1950 में राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था।


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Jitendra Vidyarthi

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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