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Bullet Train:भारत की पहली बुलेट ट्रेन की तस्वीर आई सामने, सूरत-बिलिमोरा के बीच जल्द दौड़ने की उम्मीद

भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सामने आ गई है। मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के तहत गुजरात में सूरत-बिलिमोरा के बीच जल्द बुलेट ट्रेन चलने की उम्मीद जताई गई है। प्रोजेक्ट में अंडर-सी टनल और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

अहमदाबाद
भारत की पहली बुलेट ट्रेन
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

अहमदाबाद: भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सोमवार को सामने आई। दिल्ली स्थित रेल मंत्रालय के गेट नंबर-4 पर मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट की तस्वीर प्रदर्शित की गई है। रेल मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि इसी साल गुजरात में सूरत और बिलिमोरा के बीच करीब 50 किलोमीटर लंबे रूट पर देश की पहली बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू किया जा सकता है।


मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट कुल 508 किलोमीटर लंबा है, जिसे जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से तैयार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इस रूट पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत कुल 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजना में शामिल 12 में से 8 स्टेशनों की नींव का काम पूरा हो चुका है। इनमें वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा 17 नदी पुलों का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि नर्मदा, माही, तापी और साबरमती जैसी बड़ी नदियों पर पुल निर्माण का कार्य तेजी से जारी है। महाराष्ट्र में भी चार नदी पुलों पर काम चल रहा है।


प्रोजेक्ट के तहत ठाणे, सूरत और साबरमती में रेल डिपो का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। वहीं मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्टेशन पर सिविल वर्क तेजी से आगे बढ़ रहा है। यहां खुदाई का 91 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बेसमेंट स्लैब का काम लेवल-4 तक पूरी तरह समाप्त हो गया है। इस हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट का सबसे खास हिस्सा अंडर-सी टनल है। करीब 21 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र के घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किलोमीटर लंबी टनल का काम पूरा कर लिया गया है। परियोजना के तहत 16 किलोमीटर सुरंग टनल बोरिंग मशीन (TBM) से बनाई जा रही है, जबकि बाकी 5 किलोमीटर सुरंग न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से तैयार की जाएगी। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली 7 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग भी शामिल है।


रेल मंत्रालय का कहना है कि यह प्रोजेक्ट देश में हाई स्पीड रेल तकनीक के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे ट्रैक निर्माण, एडवांस सिग्नलिंग, ट्रेन निर्माण और मेंटेनेंस जैसी आधुनिक तकनीकों में भारत की क्षमता बढ़ेगी और भविष्य में अन्य हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने में मदद मिलेगी।

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