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E-Rickshaw Safety: अब ई-रिक्शा में भी पाएं गाड़ियों वाली सुरक्षा, जनता का सबसे बड़ा डर ख़त्म करने चली मोदी सरकार

E-Rickshaw Safety: सरकार ने की ई-रिक्शा के लिए भारत एनकैप जैसी रेटिंग लाने की घोषणा.. सड़क हादसों में हर साल 1.8 लाख मौतें, GDP का 3% हो रहा नुकसान। जानें सरकार की क्या है पूरी प्लानिंग..

E-Rickshaw Safety
प्रतीकात्मक
© Google
Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

E-Rickshaw Safety: जल्द ही नई दिल्ली में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने फिक्की सड़क सुरक्षा पुरस्कार और संगोष्ठी के सातवें संस्करण को संबोधित करते हुए घोषणा की है कि सरकार ई-रिक्शा के लिए भी 'भारत एनकैप' जैसी सुरक्षा रेटिंग लाने पर विचार कर रही है। ई-रिक्शा की संख्या देशभर में तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बरकरार हैं।


गडकरी ने इस विषय पर बात करते हुए कहा है कि सड़क हादसे न सिर्फ जान लेते हैं बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका देते हैं। हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें 1.8 लाख से ज्यादा मौतें हो जाती हैं। इनमें 66.4 प्रतिशत पीड़ित 18 से 45 साल की उम्र के होते हैं जो देश के उत्पादक वर्ग का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे कहा कि जागरूकता और त्वरित इलाज से 50,000 जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।


इस बारे में सरकार की प्लानिंग साफ है और इसका अगला और सबसे बड़ा कदम है ई-रिक्शा को चार-पहिया वाहनों की तरह सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर लाना। गडकरी ने बताया है कि 2023 में चार-पहिया वाहनों के लिए भारत एनकैप लागू किया गया था जो क्रैश टेस्ट पर आधारित स्टार रेटिंग देता है। ऐसे में अब ई-रिक्शा के लिए भी ऐसा ही सिस्टम लाया जाएगा ताकि मैन्युफैक्चरर बेहतर क्वालिटी वाले वाहन बनाएं।


ई-रिक्शा अक्सर एक्सीडेंट्स का शिकार आसानी से बनते हैं क्योंकि इनके चेसिस माइल्ड स्टील से बने होते हैं और पार्ट्स की क्वालिटी कम होती है। नई रेटिंग से उपभोक्ता सुरक्षित विकल्प चुन सकेंगे और मैन्युफैक्चरर को सुधार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। गडकरी ने कहा, "हम ई-रिक्शा की संख्या को देखते हुए इनकी सेफ्टी सुधारने के तरीके तलाश रहे हैं।" यह कदम न सिर्फ सड़क सुरक्षा बढ़ाएगा बल्कि अफ्रीका, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में निर्यात को भी बूस्ट देगा।


गडकरी ने खुलासा किया है कि सड़क हादसे देश के जीडीपी के करीब 3 प्रतिशत को प्रभावित करते हैं। सिर्फ हेलमेट न पहनने से 30,000 और सीट बेल्ट न लगाने से 16,000 मौतें होती हैं। सरकार ने सड़क सुरक्षा ऑडिट कराए हैं लेकिन अभी तक सफलता उतनी नहीं मिली जितनी अन्य क्षेत्रों में मिली है। गडकरी ने अपील की है कि दुर्घटना के शिकारों को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है क्योंकि शुरुआती इलाज से जान बच सकती है। इसके अलावा ट्रक ड्राइवर्स के लिए वर्किंग आवर्स तय करने और 32 ड्राइविंग इंस्टीट्यूट खोलने की योजना भी आगे है।


यह हालिया घोषणा आने वाले समय में सड़क सुरक्षा को नई दिशा देगी। ई-रिक्शा एक तरह से आखिरी मील कनेक्टिविटी का माध्यम हैं और आने वाले समय में ये पहले से काफी ज्यादा सुरक्षित होंगे। सरकार का फोकस न सिर्फ वाहनों पर बल्कि उसके साथ जागरूकता और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी है। मोदी सरकार की यह पहल बिहार जैसे राज्यों में लाखों लोगों की जिंदगी बचा सकती है।

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