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AADHAAR UPDATE में आ रही परेशानी? हाईकोर्ट की UIDAI को लगाई कड़ी फटकार, सुधार के दिए सख्त निर्देश

AADHAAR UPDATE: बॉम्बे हाईकोर्ट ने UIDAI को निर्देश दिया है कि आधार की तकनीकी या बायोमेट्रिक गड़बड़ियों के कारण नागरिकों को परेशानी न हो और उनकी समस्याओं का समाधान समयबद्ध व मानवीय तरीके से किया जाए।

Aadhaar update UIDAI
प्रतिकात्मक तस्वीर
© File
Mukesh Srivastava
3 मिनट

AADHAAR UPDATE: बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि आधार रिकॉर्ड में तकनीकी या बायोमेट्रिक गड़बड़ियों के कारण किसी भी नागरिक को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिस्टम की खामी के चलते वास्तविक नागरिकों को उनके अधिकारों और सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता।


जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस हितेन एस. वेणेगांवकर की खंडपीठ ने 6 मई को दिए आदेश में UIDAI की कार्यशैली पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि आधार डेटाबेस की शुद्धता राष्ट्रीय महत्व का विषय है, लेकिन इसे लागू करने की प्रक्रिया नागरिक-केंद्रित, सरल और संवैधानिक होनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल तकनीकी या बायोमेट्रिक त्रुटियों के कारण किसी भी वास्तविक नागरिक को बिना समाधान के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने दिए जा सकते।


यह आदेश 19 वर्षीय जुड़वां भाइयों रोहित और राहुल निकलजे की याचिका पर दिया गया। दोनों को 2012 में नाबालिग रहते आधार कार्ड जारी हुआ था। 2022 में बायोमेट्रिक्स अपडेट कराने के दौरान उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्हें कभी अपडेट कराने को कहा गया, कभी कार्ड रद्द करने की सलाह दी गई, और बाद में उनकी प्रक्रिया रोककर आधार नंबर ही सस्पेंड कर दिए गए। आधार न होने के कारण दोनों भाइयों को कॉलेज में प्रोविजनल एडमिशन और खेल गतिविधियों के लिए इंश्योरेंस लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।


हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बचपन में लिए गए बायोमेट्रिक्स में कोई त्रुटि हुई है, तो उसका खामियाजा नागरिकों को नहीं भुगतना चाहिए। कोर्ट ने दोनों भाइयों को 15 दिनों के भीतर नया आवेदन दाखिल करने और UIDAI को 4 सप्ताह में उस पर निर्णय लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि आधार प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।


कोर्ट ने भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए UIDAI को निम्न निर्देश दिए—

स्पष्ट और लिखित जानकारी: नागरिकों को समस्या और समाधान की पूरी जानकारी लिखित रूप में दी जाए।

सुविधा केंद्रों की स्थापना: सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में सहायता केंद्र बनाए जाएं।

समयबद्ध निर्णय: सभी आवेदनों पर अधिकतम 4 सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।

मानवीय दृष्टिकोण: वास्तविक नागरिकों के मामलों में संवेदनशील और मानवीय रवैया अपनाया जाए।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता