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विश्व स्तनपान सप्ताह पर NSMCH बिहटा की पहल, डॉक्टरों ने समझाया मां के दूध का महत्व; जानिए नवजात के लिए क्यों है सबसे खास

NSMCH News: बिहटा के नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह के समापन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. विशेषज्ञों ने माताओं को स्तनपान के महत्व, शिशु पोषण और स्वस्थ विकास से जुड़ी अहम जानकारियां दीं.

विश्व स्तनपान सप्ताह पर NSMCH बिहटा की पहल, डॉक्टरों ने समझाया मां के दूध का महत्व; जानिए नवजात के लिए क्यों है सबसे खास
Ramakant kumar
3 मिनट

NSMCH News: बिहटा स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NSMCH) में विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के समापन अवसर पर शिशु रोग विभाग की ओर से जागरूकता एवं शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य माताओं और उनके परिवारों को स्तनपान के महत्व से अवगत कराना तथा शिशुओं के स्वस्थ पोषण और समुचित विकास के प्रति जागरूक करना था.


कार्यक्रम में शिशु रोग विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में माताओं ने भाग लिया. इस दौरान विशेषज्ञों ने जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने, जीवन के पहले छह महीनों तक केवल मां का दूध पिलाने और दो वर्ष या उससे अधिक समय तक पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने के लाभों की विस्तार से जानकारी दी.


शिशु रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बांके बिहारी सिंह ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, संपूर्ण और पौष्टिक आहार है. इससे शिशु को आवश्यक पोषक तत्व मिलने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है. उन्होंने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान की शुरुआत और शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध पिलाना बच्चे के स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव रखता है. उन्होंने प्रत्येक मां को स्तनपान के लिए परिवार और समाज से सहयोग व प्रोत्साहन मिलने की आवश्यकता पर भी जोर दिया.


उन्होंने बताया कि स्तनपान से केवल शिशु ही नहीं, बल्कि माताओं को भी कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. इससे प्रसव के बाद स्वास्थ्य बेहतर होता है और स्तन तथा डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर का खतरा भी कम हो सकता है.


कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों और मिथकों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि परिवार और समाज का सहयोग मिलने पर अधिक से अधिक माताएं सफलतापूर्वक स्तनपान करा सकती हैं. वक्ताओं ने इसे शिशु मृत्यु दर और बीमारियों को कम करने के साथ बच्चों के समग्र विकास का सबसे प्रभावी और किफायती उपाय बताया.


इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) बिनोद कुमार सिंह, प्रो. (डॉ.) अविनाश कुमार सहाय, डॉ. नितीश कुमार, डॉ. श्वेता, डॉ. कन्नू प्रिया और डॉ. जयमाला ने भी अपने विचार साझा किए. सभी विशेषज्ञों ने सुरक्षित और सफल स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान को गांव-गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया.