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11 साल बाद जिंदा घर लौटी 80 वर्षीया लीलावती, मृत समझ परिवारवाले हर साल मना रहे थे पुण्यतिथि

11 साल से लापता 80 वर्षीय लीलावती जिंदा अपने घर लौट आईं। परिवार ने उन्हें मृत मानकर कई सालों से श्राद्ध कर रहा था। उनकी वापसी से पूरे गांव में खुशी और उत्सव का माहौल है।

उत्तर प्रदेश न्यूज
घर में जश्न का माहौल
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में 11 साल बाद एक चमत्कार देखने को मिला। 2015 में लापता हुई 80 वर्षीय लीलावती अचानक अपने घर लौट आईं। परिवार के सदस्यों ने उन्हें मृत मान लिया था और पिछले कई सालों से उनकी पुण्यतिथि मना रहे थे। उनकी वापसी से पूरे गांव में खुशी और उत्सव का माहौल है। परिवार के लोग अपनी मां के जीवित लौटने पर भावुक हैं और फूले नहीं समा रहे हैं।


लीलावती 2015 में अपने खेत पर गई थीं और फिर कभी वापस नहीं लौटीं। उनकी मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिवार को डर था कि वह रास्ता भटक गई होंगी। परिवार ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में उन्हें तलाशा, थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई और पोस्टर भी लगाए, लेकिन चार साल तक कोई सुराग नहीं मिला। अंततः परिवार ने उन्हें मृत मानकर श्राद्ध करना शुरू कर दिया।


दरअसल, लीलावती भटकते हुए जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र तक पहुंच गई थीं। वहां भारतीय सेना और जम्मू पुलिस ने उन्हें लावारिस हालत में पाया और उनकी देखभाल की। पहचान करने के प्रयास के बाद उनकी जानकारी उत्तर प्रदेश के बागपत पुलिस तक पहुंचाई गई। परिजनों को सूचना मिलने पर पहले तो विश्वास नहीं हुआ, लेकिन बाद में सेना ने वीडियो कॉल के जरिए लीलावती को दिखाया, जिसके बाद परिवार भावुक हो उठा।


उनके बेटे और अन्य परिजन तुरंत सुरनकोट पहुंचे और उन्हें अपने साथ घर ले आए। घर लौटते ही खुशी की लहर दौज्जा गांव में फैल गई। लोगों ने मिठाइयां बांटी, डीजे बजाया और इस चमत्कारिक वापसी का जश्न मनाया। परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि लीलावती दोबारा जिंदा मिलेंगी। उनके पौत्र बिल्लू ने बताया कि चार साल तक लगातार तलाश करने के बाद, जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्हें मृत मान लिया गया था।


पिछले सात साल से परिवार उनका श्राद्ध कर रहा था। अब दादी को अपने बीच पाकर पूरा परिवार बेहद खुश और भावुक है। यह घटना न केवल उम्मीद की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी-कभी चमत्कार सच में होते हैं।

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