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Mokama murder case : दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह ने लिया सूरजभान का नाम; अब बाहुबली नेता ने दिया जवाब,कहा - उच्च स्तरीय जांच में हो जाएगा दूध का ढूध पानी का पानी

Mokama murder case : मोकामा हत्याकांड में अनंत सिंह के आरोपों का सूरजभान सिंह ने जवाब दिया। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग की और राजनीति से दूरी बनाए रखने की अपील की।

Mokama murder case : दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह ने लिया सूरजभान का नाम; अब बाहुबली नेता ने दिया जवाब,कहा - उच्च स्तरीय जांच में हो जाएगा दूध का ढूध पानी का पानी
Tejpratap
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6 मिनट

Mokama murder case : बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पटना जिले की मोकामा सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशियों के बीच गुरुवार को भिड़ंत्त हो गई। जदयू प्रत्याशी एवं बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह और जन सुराज के कैंडिडेट पीयूष प्रियदर्षी के काफिले चुनाव प्रचार के दौरान अचानक आमने-सामने आ गए। तभी दोनों ही पक्षों के समर्थकों के बीच गाली-गलौज होना शुरू हो गई। फिर बवाल इतना बढ़ा कि फायरिंग और रोड़ेबाजी हुई। इसमें पीयूष के समर्थन में प्रचार कर रहे बाहुबली दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई। इसके बाद अब इस मामले में सूरजभान सिंह का बयान सामने आया है। 


इसके बाद अब मोकामा विधानसभा क्षेत्र में पहले ही राजनीतिक तनाव चरम पर है, वहीं हाल ही में हुए हत्याकांड ने माहौल और गरम कर दिया है। मोकामा के पूर्व विधायक और जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह द्वारा राजद प्रत्याशी वीणा देवी के पति सूरजभान सिंह पर दुलारचंद हत्याकांड में कथित रूप से शामिल होने के आरोप लगाने के बाद अब सूरजभान सिंह ने अपना जवाब दिया है।


सूरजभान सिंह ने कहा कि वे अनंत सिंह के आरोपों का कोई जवाब नहीं देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया, “मैं अनंत सिंह की बातों का कोई जवाब नहीं दूंगा। बस इतना कहूंगा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और उसके बाद खुद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।” उन्होंने मोकामा में हाल ही में हुई घटना को अत्यंत निंदनीय करार दिया और कहा कि इस तरह की घटनाएँ किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हैं।


सूरजभान सिंह ने आगे कहा कि इस घटना के बाद उन्हें चुनाव प्रक्रिया और इलेक्शन कमीशन पर विश्वास उठता हुआ महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा, “जहाँ केवल 10 उम्मीदवार हैं और कुछ ही लोग मतदान करने वाले हैं, वहां आदर्श आचार संहिता लागू होते हुए भी ऐसी घटनाएँ कैसे हो रही हैं, यह समझ से परे है।” उनका कहना था कि मोकामा के लोगों में इस घटना के बाद भय और दहशत फैली है, लेकिन वे उम्मीद करते हैं कि उचित न्याय होगा और दोषियों को सजा मिलेगी।


सूरजभान सिंह ने कहा कि इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “लेडी इलेक्शन कमीशन और पुलिस प्रशासन से यही मांग होगी कि इस मामले की कुछ स्तरीय जांच हो। पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर निर्णय लें और इसे पारदर्शी तरीके से निष्पक्षता के साथ सुलझाया जाए। मैं यह सुझाव देना चाहता हूँ कि रिटायर्ड जजों की एक विशेष बेंच बनाई जाए और इस मामले का निष्पक्ष फैसला लिया जाए। इससे सभी तथ्य सामने आ जाएंगे और सब कुछ साफ हो जाएगा।”


उन्होंने मीडिया से भी कहा कि वे इस मामले में फिलहाल कोई और बयान नहीं देंगे। उनके अनुसार, मुख्य जरूरत है कि जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हो। “जांच में राजनीति का दखल नहीं होना चाहिए। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे कानून के अनुसार सजा मिले और निर्दोष को कोई परेशानी न हो,” उन्होंने कहा।


मोकामा हत्याकांड के बाद स्थानीय लोगों में चिंता और डर का माहौल है। कई मतदाताओं ने भी चुनाव आयोग से सुरक्षा बढ़ाने और घटना की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के पहले यह घटनाएँ मतदाताओं के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।


राजनीतिक रूप से देखें तो यह मामला जेडीयू और राजद के बीच पहले से ही जारी प्रतिद्वंद्विता को और बढ़ा सकता है। अनंत सिंह द्वारा सूरजभान सिंह पर लगाए गए आरोप और सूरजभान सिंह का उनका खंडन, दोनों ही राजनीतिक तौर पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच ही सही दिशा होगी, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या साजिश से चुनावी माहौल प्रभावित न हो।


मोकामा के मतदाताओं की उम्मीद है कि प्रशासन और चुनाव आयोग मिलकर इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएँगे। वहीं राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे इस घटना का राजनीतिकरण करने के बजाय न्याय प्रक्रिया का समर्थन करें। इससे न सिर्फ घटना के दोषियों की पहचान होगी, बल्कि मोकामा में सामान्य जनजीवन और मतदान प्रक्रिया भी सुरक्षित बनेगी।


इस पूरी घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनावी माहौल में हिंसा और विवाद तेजी से बढ़ सकते हैं। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतना और कानून का सम्मान करना आवश्यक है। सूरजभान सिंह के अनुसार, “सिर्फ निष्पक्ष जांच ही इस मामले में अंतिम समाधान प्रदान कर सकती है और लोगों का विश्वास बहाल कर सकती है।”


मोकामा हत्याकांड की जांच और अनंत सिंह के आरोपों का जवाब, दोनों ही अब बिहार विधानसभा चुनाव की चर्चा का मुख्य विषय बन चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन और चुनाव आयोग इस मामले को किस प्रकार सुलझाते हैं और मतदाताओं का भरोसा कैसे बहाल किया जाता है।