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Bihar Chunav 2025 : दिल्ली हिंसा के बाद भी बिहार के मतदाताओं में दिख रहा गजब का उत्साह, नाश्ते से पहले फर्स्ट टाइम वोटर समेत हर वर्ग के वोटरों की दिख रही लंबी लाइन

दिल्ली हिंसा के बाद भी बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं में गजब का उत्साह देखा गया। नाश्ता करने से पहले ही फर्स्ट टाइम वोटर समेत हर वर्ग के लोग मतदान केंद्रों पर लंबी कतारों में नजर आए।

Bihar Chunav 2025 : दिल्ली हिंसा के बाद भी बिहार के मतदाताओं में दिख रहा गजब का उत्साह, नाश्ते से पहले फर्स्ट टाइम वोटर समेत हर वर्ग के वोटरों की दिख रही लंबी लाइन
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar Chunav 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मंगलवार को मतदान शुरू होते ही राज्यभर में वोटिंग केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। दिलचस्प बात यह रही कि दिल्ली में हुई हालिया हिंसा और उससे पैदा हुए तनावपूर्ण माहौल का असर बिहार के मतदाताओं पर बिल्कुल नहीं दिखा। सुबह की ठंडी हवा और हल्की धुंध के बीच लोग नाश्ता करने से पहले ही वोट डालने के लिए निकल पड़े। खासकर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं में जबरदस्त जोश देखने को मिला।


सुबह सात बजे से ही मतदान केंद्रों पर हलचल शुरू हो गई थी। कई जगहों पर महिलाएं बच्चों के साथ पहुंचीं, तो कहीं बुजुर्गों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि “हमने हर चुनाव में वोट दिया है, इस बार भी अपना हक जताने आए हैं।” युवाओं में भी लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर भारी उत्साह देखा गया।, गया, दरभंगा, मोतिहारी समेत ज्यादातर जिलों में मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें लगीं रहीं।


दिल्ली में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं कि इसका असर बिहार के चुनावी माहौल पर भी पड़ेगा। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम और प्रशासन की तत्परता के चलते मतदाताओं में पूरी तरह से विश्वास का माहौल बना रहा। मतदान केंद्रों के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात थे और महिला सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।


मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र की एक कॉलेज छात्राने बताया कि वह पहली बार वोट डालने आई हैं और इस दिन का बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने कहा, “वोट हमारा अधिकार है। हम ही तय करेंगे कि हमारे राज्य की सरकार कैसी होनी चाहिए।” इसी तरह गया जिले के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे 70 वर्षीय सुरेश यादव ने कहा कि वे हर बार वोट डालने आते हैं, क्योंकि यही लोकतंत्र की असली ताकत है।


दिल्ली हिंसा के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती। हर मतदान केंद्र पर सीसीटीवी निगरानी, पुलिस और होमगार्ड की तैनाती की गई थी। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जा रही थी। इसके बावजूद लोगों में डर नहीं बल्कि उत्साह का माहौल दिखा।


महिलाओं की भागीदारी भी इस चरण में काफी अधिक रही। कई जगहों पर महिलाओं की लाइनें पुरुषों से लंबी नजर आईं। ग्रामीण इलाकों में भी मतदाताओं ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। नवादा, जहानाबाद, नालंदा और रोहतास जैसे जिलों में सुबह से ही गांव-गांव में मतदान केंद्रों की ओर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।


राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दिल्ली में हुई हिंसा जैसी घटनाओं से बिहार के मतदाताओं के रुझान पर कोई असर नहीं पड़ा। बल्कि, लोगों ने शांतिपूर्ण और बड़े उत्साह के साथ लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। यह इस बात का प्रमाण है कि बिहार का मतदाता अब काफी परिपक्व हो चुका है और मुद्दों के आधार पर मतदान करना चाहता है।


बिहार चुनाव आयोग के मुताबिक, पिछले चरण में दोपहर तक लगभग 28% मतदान दर्ज किया गया था, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह प्रतिशत और अधिक था। आयोग ने बताया कि दोपहर तक मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और कहीं से भी किसी बड़े विवाद या गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।


कुल मिलाकर, दिल्ली हिंसा की छाया से दूर बिहार के मतदाताओं ने लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुबह-सुबह नाश्ता छोड़कर मतदान केंद्र पहुंचना इस बात का संकेत है कि बिहार की जनता अब अपने वोट की ताकत को बखूबी समझने लगी है। चाहे युवा हों, महिलाएं हों या बुजुर्ग — हर वर्ग के लोगों ने यह दिखा दिया कि लोकतंत्र की असली शक्ति जनता के हाथ में ही है।