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Bihar Election 2025: बिहार में आदर्श आचार संहिता के दौरान हर दिन बरामद हो रही बड़ी रकम, जब्त पैसों का क्या करता है चुनाव आयोग?

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। बिना वैध दस्तावेज बड़ी रकम ले जाने पर रकम जब्त की जा सकती है। जानिए जब्त कैश का क्या होता है।

Bihar Election 2025
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही राज्य की सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने पहले चरण की वोटिंग 6 नवंबर और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को तय की है, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इसी के साथ पहले चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, और पूरे राज्य में चुनावी हलचल बढ़ गई है।


लेकिन चुनाव की घोषणा के साथ ही एक अहम पहलू सक्रिय हो गया है, वह है आदर्श आचार संहिता। यह संहिता चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए लागू की जाती है। आचार संहिता लागू होते ही कोई भी पार्टी, प्रत्याशी या आम नागरिक बिना अनुमति ऐसी कोई गतिविधि नहीं कर सकता जो चुनाव को प्रभावित करे। खास तौर पर कैश लेन-देन पर चुनाव आयोग की पैनी नजर रहती है।


यदि कोई व्यक्ति बड़ी रकम लेकर यात्रा करता है, तो उसे उस पैसे का स्रोत, उपयोग और उद्देश्य स्पष्ट करना होता है। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है, तो वह राशि जब्त कर ली जाती है। कैश जब्ती की स्थिति में चुनाव आयोग या पुलिस टीम वह राशि आयकर विभाग को सौंप देती है।


अगर जब्त की गई राशि 10 लाख या उससे अधिक है, तो उसे सीधे जिला ट्रेजरी में जमा कराया जाता है और इसकी सूचना तत्काल इनकम टैक्स नोडल अधिकारी को दी जाती है। यदि व्यक्ति यह साबित कर दे कि वह पैसा वैध आय है और चुनाव से इसका कोई लेना-देना नहीं है, तो उचित दस्तावेजों के आधार पर वह पैसा वापस मिल सकता है।


पैसा वापस पाने के लिए जरूरी दस्तावेज पेश करने होते हैं, जिसमें बैंक स्टेटमेंट या पासबुक एंट्री, एटीएम से पैसे निकालने की रसीद, बैंक निकासी की स्लिप, भुगतान का कोई प्रमाण और पहचान पत्र शामिल हैं। यदि इन दस्तावेजों से यह प्रमाणित हो जाए कि पैसा चुनाव प्रभावित करने के उद्देश्य से नहीं ले जाया जा रहा था, तो वह रकम व्यक्ति को वापस कर दी जाती है।


यदि कोई व्यक्ति जब्त की गई रकम पर दावा नहीं करता, या करता है लेकिन उचित दस्तावेज नहीं दे पाता, तो वह राशि सरकारी खजाने में जमा कर दी जाती है। इसके बाद व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होते ही चुनाव आयोग और पुलिस की टीमें पूरे राज्य में सक्रिय हो गई हैं। अलग-अलग जिलों में नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की जा रही है ताकि कोई भी अवैध गतिविधि न हो सके।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता