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Bihar assembly election : अमित शाह ने बिहार बीजेपी नेताओं को दी नसीहत, कहा– विजय का घमंड न हो, ‘जहां कम, वहां हम’ अपनाएं

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद BJP नेताओं को घमंड न करने की नसीहत दी और कहा– ‘जहां कम, वहां हम’ नीति अपनाएं।

Bihar assembly election : अमित शाह ने बिहार बीजेपी नेताओं को दी नसीहत, कहा– विजय का घमंड न हो, ‘जहां कम, वहां हम’ अपनाएं
Tejpratap
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Bihar assembly election : भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ऐतिहासिक जीत के बाद राज्य भाजपा नेताओं को महत्वपूर्ण नसीहत दी है। जीत के जश्न में घमंड और आत्मसंतोष न करने की सलाह देते हुए शाह ने कहा कि यह सफलता पूरी टीम का प्रयास है, न कि किसी एक नेता की।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सरकार गठन के बाद बुधवार को अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी सहित तमाम बड़े नेता मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक का मुख्य उद्देश्य पार्टी और गठबंधन की बंपर जीत का मूल्यांकन करना और आगामी चुनावों के लिए रणनीति तय करना था।


बैठक में अमित शाह ने स्पष्ट किया कि बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई है। शाह ने नेताओं से कहा, “सभी नेताओं ने परिश्रम की पराकाष्ठा की है। चुनाव में एक प्रतिशत का योगदान भी बहुत बड़ा होता है, लेकिन कोई यह न सोचे कि जीत केवल उसकी वजह से मिली है। ऐसा सोचना घमंड को जन्म देता है और पार्टी के काम में बाधा डाल सकता है।”


शाह ने यह भी कहा कि भविष्य में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनावों के मद्देनजर सभी नेता और कार्यकर्ता तैयार रहें। किसी भी समय किसी भी क्षेत्र में पार्टी का काम करने भेजा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने ‘जहां कम, वहां हम’ का मंत्र दिया और कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए कमजोर पड़ते क्षेत्रों में पार्टी की ताकत पहुंचाना जरूरी है।


बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की बात करें तो भाजपा ने 101 सीटों में से 89 सीटें जीतकर पहली बार राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनने का गौरव हासिल किया है। वहीं, जदयू ने 101 सीटों में से 85 सीटों पर जीत दर्ज की। इस प्रकार एनडीए के कुल 202 विधायक जीते हैं, जो 243 सदस्यीय विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत से भी अधिक है।


विपक्षी महागठबंधन को बिहार में मात्र 35 सीटों पर सफलता मिली। इस गठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) मुख्य विपक्षी दल है। तेजस्वी यादव की पार्टी ने 25 सीटों पर जीत हासिल की, जिससे उनका मुख्य विपक्षी दल का दर्जा मुश्किल से बना। अगर पार्टी को 23 सीटें मिली होतीं, तो तेजस्वी यादव को नेता विपक्ष का पद नहीं मिलता और इसके साथ ही उन्हें मिलने वाली कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएं भी छिन जातीं।


अमित शाह ने बैठक में यह भी जोर दिया कि भाजपा और एनडीए की सफलता का श्रेय पूरी टीम को जाता है। उन्होंने कहा कि चुनाव में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी नेता या कार्यकर्ता को व्यक्तिगत रूप से विजेता मानकर घमंड नहीं करने दिया जाना चाहिए।


बैठक में यह रणनीति भी तय की गई कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए बिहार के नेता अन्य राज्यों में संगठन की मजबूती के लिए योगदान देंगे। शाह ने नेताओं को समझाया कि पार्टी की विजय केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को मजबूत बनाना और हर क्षेत्र में पार्टी की पहुंच बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने कहा, “बीजेपी का मूल मंत्र यही है कि जहां पार्टी कमजोर है, वहां हम जाकर उसे मजबूत बनाएं। इसी सोच के साथ हमें भविष्य के चुनावों की तैयारी करनी है। सभी नेता और कार्यकर्ता इस दृष्टिकोण से काम करें।”


बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने विचार साझा किए और आगामी चुनावों में राज्य और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को प्रचारित करने की योजना बनाई। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल एक चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि एनडीए के संगठनात्मक बल और जनता से जुड़े रहने का प्रमाण है।


इस प्रकार बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बाद अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि सफलता व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास का परिणाम है। पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता आगे बढ़कर ‘जहां कम, वहां हम’ की नीति अपनाकर संगठन को मजबूत बनाने और भविष्य के चुनावों की तैयारी में जुटेंगे।