WEST CHAMPARAN: बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए 10 साल हो गये हैं, लेकिन शराब के धंधेबाज अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। वो शराब तस्करी के रोज नये-नये हथकंडे अपना रहे हैं। कभी एम्बुलेंस, तो कभी वाहनों में तहखाना बनाकर, पेट्रोल टैक में छिपाकर, तरबूज और सिलेंडर में छिपाकर ना जाने कितने हथकंडे अपनाकर ये लोग शराब की तस्करी कर रहे है। ऐसा लगता है कि इन लोगों ने हम नहीं सुधरेंगे की मानो कसम ही खा ली है।
यही कारण है कि आए दिन वाहनों की जांच के दौरान इस तरह की होशियारी पकड़ी जाती है। ताजा मामला पश्चिम चंपारण के नदी थानाक्षेत्र के रेहुवा चेकपोस्ट से आ रही है। जहां पुलिस ने डेयरी वैन को पकड़ा है, जिसमें दूध की गाड़ी में तहखाना बनाकर शराब की की तस्करी की जा रही थी। मिल्क वैन के अंदर दूध के पैकेट के बीच भारी मात्रा में विदेशी शराब के कार्टन मिलने से पुलिस कर्मी भी हैरान रह गये।
ब्लू कलर के पियाजियो तीन चक्का मालवाहक पर सवार दो तस्कर दूध के कैरेट में अंग्रेजी शराब की पेटियां छिपाकर सप्लाई देने निकले थे। मानो आजकल दूध नहीं, “दारू” ही घर-घर पहुंचाने का नया ट्रेंड चल पड़ा हो। तस्करों ने ‘मिल्क रूट’ को ही ‘दारू रूट’ बना दिया था, लेकिन पुलिस ने साबित कर दिया यहां हर ट्रे का एक्स-रे नजरों से ही हो जाता है। उनका यह देसी स्टार्टअप ज्यादा देर टिक नहीं पाया।
चेकिंग के दौरान पुलिस ने गाड़ी रोकी और ‘दूध के ट्रे’ की परतें खुलते ही अंदर से निकली 35 कार्टन अंग्रेजी शराब कुल 302.4 लीटर। यानी, अगर ये सप्लाई पहुंच जाती तो कई इलाकों में ‘नशे की होम डिलीवरी’ हो जाती। गिरफ्तार तस्करों की पहचान सिवान के जमोबाजार थानाक्षेत्र अंतर्गत गेहूंआ गांव निवासी व्यास प्रसाद और उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के भरूआ समेरपुर निवासी अमर सिंह के रूप में हुई है। दोनों ने शायद सोचा था कि दूध के ट्रे में छुपाकर कानून की आंखों में धूल झोंक देंगे, लेकिन पुलिस की नजर इतनी ‘पतली’ नहीं निकली। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।
बेतिया से संतोष कुमार की रिपोर्ट





