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बिहार टेंडर घोटाले में SVU की बड़ी कार्रवाई: रिशुश्री का सहयोगी संतोष गिरफ्तार, ED की रडार पर कई IAS अधिकारी, दो हो चुके हैं सस्पेंड

Bihar Tender Scam: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई ने रिशुश्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से कथित संबंध और भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं।

Bihar Tender Scam
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar Tender Scam: बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए टेंडर माफिया रिशुश्री के करीबी सहयोगी संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। संतोष कुमार को पटना से गिरफ्तार किया गया है। वह रिशुश्री की कंपनी मातृस्वा का निदेशक बताया जाता है और मामले में दर्ज प्राथमिकी में प्राथमिक अभियुक्त भी है।


जांच एजेंसियों के अनुसार रिशुश्री ने मातृस्वा, रिलायबल इंफ्रा समेत कई कंपनियों का गठन कर सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी का नेटवर्क खड़ा किया था। बताया जा रहा है कि रिलायबल कंपनी भी संतोष कुमार के नाम पर संचालित की जाती थी। इस कंपनी में रिशुश्री की पत्नी ऋतंभरा भी निदेशक हैं। आरोप है कि इन्हीं कंपनियों के जरिए टेंडरों में गड़बड़ी की जाती थी और पूरे नेटवर्क का संचालन सुपौल से किया जाता था।


प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में टेंडर घोटाले के मास्टरमाइंड रिशुश्री और कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों के संकेत मिले हैं। मामले में पहले ही आईएएस अधिकारी योगेश कुमार सागर और अभिलाषा कुमारी शर्मा को निलंबित किया जा चुका है, जबकि कई अन्य अधिकारी भी विभिन्न जांच एजेंसियों की रडार पर हैं।


जांच एजेंसियों को मिले दस्तावेजों से संकेत मिला है कि रिशुश्री के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से बेहद करीबी संबंध थे। आरोप है कि वह टेंडर प्रबंधन और प्रभाव स्थापित करने के लिए उस अधिकारी के नाम का इस्तेमाल करता था।


सूत्रों के मुताबिक, रिशुश्री के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया है कि उसके मोबाइल में कुछ नंबर "आईएएस भैया" जैसे नामों से सेव थे। इस खुलासे के बाद एजेंसियों ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी है।


अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका केवल व्यक्तिगत संपर्क तक सीमित थी या उन्होंने सरकारी प्रक्रियाओं और टेंडर आवंटन को प्रभावित करने में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष योगदान दिया था।


विशेष निगरानी इकाई और अन्य जांच एजेंसियां मामले से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ टेंडर घोटाले के पूरे नेटवर्क, उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों और कथित भ्रष्टाचार के बड़े तंत्र का पर्दाफाश हो सकता है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता