Hindi News / crime / MBA की फीस के लिए बेची किडनी… 9 लाख का वादा, 60 लाख...

MBA की फीस के लिए बेची किडनी… 9 लाख का वादा, 60 लाख का खेल, एक झगड़े ने खोला खौफनाक रैकेट

पढ़ाई पूरी करने का सपना और पैसों की कमी—इन दोनों के बीच फंसे एक छात्र की कहानी अब बड़े खुलासे में बदल गई है। कानपुर में किडनी बेचने के इस मामले ने अवैध अंग तस्करी के नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 31, 2026, 1:28:31 PM

MBA की फीस के लिए बेची किडनी… 9 लाख का वादा, 60 लाख का खेल, एक झगड़े ने खोला खौफनाक रैकेट

- फ़ोटो

अक्सर सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो या मीम्स देखने को मिलते हैं, जहां कोई महंगी चीज खरीदने पर दोस्त मजाक में कहता है—“इतने पैसे कहां से आए?” और जवाब आता है—“किडनी बेच दी!” आमतौर पर लोग इसे हंसी में उड़ा देते हैं। लेकिन कानपुर से सामने आई एक घटना ने इस मजाक को सच्चाई में बदल दिया है, और वह भी इतनी खौफनाक कि सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं।


फीस भरने की मजबूरी और खतरनाक फैसला

जानकारी के मुताबिक, बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला आयुष मेरठ में रहकर MBA की पढ़ाई कर रहा था। पढ़ाई के आखिरी साल में उसकी फीस जमा करनी थी, लेकिन घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। परिवार से मदद मिलने की उम्मीद कम थी, और समय भी तेजी से निकल रहा था।


इसी दबाव और मजबूरी में आयुष ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसकी कीमत उसे जिंदगी भर चुकानी पड़ सकती है। वह ऐसे लोगों के संपर्क में आया, जो मानव अंगों की खरीद-फरोख्त का अवैध कारोबार करते हैं।


9 लाख का सौदा, लेकिन मिला सिर्फ 5 लाख

आयुष को किडनी बेचने के लिए 9 लाख रुपये देने का वादा किया गया। उसे भरोसा दिलाया गया कि ऑपरेशन के बाद पूरी रकम मिल जाएगी। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली।


सर्जरी के बाद उसकी किडनी निकाल ली गई, लेकिन उसे केवल 5 लाख रुपये ही दिए गए। बाकी 4 लाख रुपये के लिए जब उसने बार-बार मांग की, तो उसे टालमटोल किया जाने लगा। इसी विवाद ने इस पूरे किडनी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।


एक किडनी… 60 लाख का खेल

जांच में जो खुलासा हुआ, वह और भी चौंकाने वाला है। जिस किडनी के लिए आयुष को 9 लाख रुपये देने की बात कही गई थी, उसी किडनी के बदले मरीज से करीब 60 लाख रुपये तक वसूले गए। यानी डोनर को मामूली रकम देकर असली मुनाफा डॉक्टरों, अस्पतालों और बिचौलियों के बीच बांट लिया जाता था। यह पूरा खेल बेहद संगठित तरीके से चल रहा था, जिसमें हर किसी की अपनी-अपनी भूमिका तय थी।


वार्डबॉय बना ‘डॉक्टर’, ऐसे चलता था पूरा नेटवर्क

इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल उर्फ शिवम काना बताया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि वह पेशे से एक वार्डबॉय है, लेकिन खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। वह खास तौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों या किसी बड़ी परेशानी में हों। भरोसा जीतने के बाद उन्हें किडनी बेचने के लिए तैयार किया जाता था।


पुलिस जांच में सामने आया है कि ऑपरेशन आहूजा नर्सिंग होम में किया जाता था। सर्जरी के बाद डोनर और मरीज को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।


फर्जी कागजों से बनाया जाता था ‘रिश्तेदार’

इस अवैध ट्रांसप्लांट को कानूनी दिखाने के लिए कागजों में हेरफेर की जाती थी। आयुष को किडनी लेने वाली महिला का “दूर का रिश्तेदार” बताया गया। फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरे मामले को “इमोशनल डोनेशन” का रूप दिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।


इस मामले में डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति आहूजा और शिवम अग्रवाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं।


जांच एजेंसियां एक्शन में, कई अस्पताल रडार पर

मामला सामने आने के बाद एसटीएफ, विजिलेंस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। कानपुर के कई बड़े अस्पताल जांच के घेरे में हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर ली जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।


पीड़ित की आपबीती, सुनकर कांप उठेंगे आप

आयुष ने बताया कि उसे पैसों का लालच देकर इस जाल में फंसाया गया। ऑपरेशन के बाद जब उसने अपने पूरे पैसे मांगे, तो उसे डराया-धमकाया गया और जबरन कागजों पर साइन करवाए गए। उसने यह भी कहा कि अब उसे अपनी सेहत और भविष्य दोनों की चिंता सता रही है।