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मुर्गी फार्म की आड़ में शराब तस्करी का खुलासा, 30 लाख का माल बरामद

गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र में उत्पाद विभाग की टीम ने मुर्गी फार्म में छापेमारी कर 2006 लीटर विदेशी शराब जब्त किया है। करीब 30 लाख रुपये मूल्य की शराब के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक पूर्व मुखिया का बेटा भी शामिल है।

बिहार न्यूज
क्या यही शराबबंदी है?
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

GOPALGANJ: बिहार में 16 साल से पूर्ण शराबबंदी लागू है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत किसी से छिपी हुई नहीं है। आए दिन शराब जब्त की जा रही है और तस्कर भी पकड़े जा रहे हैं, इसके बावजूद शराब तस्करी का खेल लगातार जारी है। शराब की होम डिलिवरी तक होने की बात सामने आ रही है। शराब तस्करों में पुलिस का डर मानो खत्म हो गया है, इसलिए शराब के धंधेबाज शराब तस्करी के तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला गोपालगंज का है जहां मुर्गी फार्म की आड़ में शराब की तस्करी किये जाने का मामला सामने आया है। 


गोपालगंज उत्पाद विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुर्गी फार्म की आड़ में चल रहे शराब तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। मुर्गी फार्म में छापेमारी कर करीब 30 लाख रुपये की विदेशी शराब बरामद की गई है। इस कार्रवाई में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक पूर्व मुखिया का पुत्र भी शामिल बताया जा रहा है। उत्पाद विभाग अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गया है। उत्पाद विभाग की इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।


बताया जाता है कि उत्पाद अधीक्षक अमृतेश कुमार झा को मिले गुप्त सूचना के आधार पर थावे थाना क्षेत्र के धतीवना चंवर स्थित एक मुर्गी फार्म पर देर रात छापेमारी की गई। छापेमार के दौरान फार्म परिसर में बने निर्माणाधीन ढांचे और गोदामनुमा हिस्सों से भारी मात्रा में विदेशी शराब बरामद की गई।


छापेमारी के दौरान कुल 2006 लीटर विदेशी शराब जब्त की गई। अधिकारियों के अनुसार बरामद शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 30 लाख रुपये है। कार्रवाई के दौरान मौके से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान थावे थाना क्षेत्र के लछवार गांव निवासी अविनाश सिंह और महमदपुर थाना क्षेत्र के राजेंद्र सहनी के रूप में हुई है।


उत्पाद विभाग की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि गिरफ्तार अविनाश सिंह स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली परिवार से जुड़ा हुआ है और वह एक पूर्व मुखिया का पुत्र है। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है।


उत्पाद विभाग का मानना है कि यह सिर्फ शराब की एक खेप नहीं, बल्कि एक संगठित तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसलिए अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी, किन रास्तों से इसकी आपूर्ति हो रही थी और किन-किन क्षेत्रों में इसकी सप्लाई की जाती थी।


गोपालगंज में हुई यह कार्रवाई न केवल शराब तस्करों के लिए बड़ा झटका है, बल्कि यह संदेश भी है कि कानून से बच निकलना आसान नहीं होगा। विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।