Google से मोबाइल नंबर निकालते हैं तो हो जाएं सावधान! बिहार में फर्जी कॉल सेंटर से चल रहा बड़ा खेल; अबतक पांच सौ लोगों से साइबर ठगी

Bihar Crime News: दानापुर और शेखपुरा में सक्रिय साइबर ठग गिरोह का ईओयू ने भंडाफोड़ किया। 27 आरोपी गिरफ्तार, कॉल सेंटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों की ठगी हुई।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Thu, 05 Feb 2026 01:54:48 PM IST

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प्रतिकात्मक - फ़ोटो Google

Bihar Crime News: पटना के दानापुर और शेखपुरा जिले में सक्रिय साइबर ठग गिरोह का आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भंडाफोड़ किया है। पूछताछ में पता चला कि गिरोह आम लोगों को तत्काल लोन दिलाने और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने का झांसा देकर ठगी कर रहा था।


जांच में सामने आया कि दानापुर और रूपसपुर में संचालित कॉल सेंटरों ने पिछले चार वर्षों में लगभग 500 लोगों से करीब एक करोड़ रुपये की ठगी की। शेखपुरा जिले में भी एप के माध्यम से तत्काल लोन दिलाने का झांसा देकर सैकड़ों लोगों की कमाई लूट ली गई।


ईओयू की टीम ने शेखपुरा और पटना में छापेमारी कर इस रैकेट में शामिल 27 लोगों को गिरफ्तार किया। साथ ही दो दर्जन स्मार्टफोन, 25 की-पैड मोबाइल, 19 लैपटॉप, 27 हार्ड डिस्क, डेढ़ दर्जन फर्जी सिम कार्ड, वाईफाई राउटर और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। तकनीकी जांच के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा रही है।


दानापुर और रूपसपुर के कॉल सेंटरों ने गूगल और अन्य स्रोतों से नागरिकों के मोबाइल नंबर इकट्ठा किए और फर्जी कॉल के माध्यम से मोबाइल रिचार्ज, रेल-हवाई टिकट बुकिंग, आधार अपडेट और डिजिटल सेवाओं का झांसा दिया। राशि लेने के बाद पीड़ितों से सभी संपर्क समाप्त कर दिए जाते थे। गिरोह में प्रत्येक सदस्य की अलग भूमिका थी; मुख्य सरगना संचालन और धन लेन-देन नियंत्रित करता था, जबकि महिला कर्मियों का उपयोग विश्वास बनाने के लिए किया जाता था।


शेखपुरा जिले में ठग मोबाइल कॉल, मैसेज और अन्य डिजिटल माध्यम से तत्काल लोन का प्रलोभन देकर प्रोसेसिंग फीस, केवाईसी चार्ज और अन्य शुल्क ऑनलाइन ले लेते थे। भुगतान मिलने के बाद पीड़ितों को कोई सेवा नहीं दी जाती और उनके मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए जाते।


ईओयू ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध ऑनलाइन नौकरी, कॉल, डिजिटल ऑफर या लोन ऑफर के झांसे में न आएं और ऐसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाना या साइबर पुलिस को दें।