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जमीन मामले में पुलिस की 'सुपरफास्ट एक्शन' पर उठे सवाल ! चट केस फट से सुपरविजन और अरेस्टिंग के आदेश...अब DIG के पाले में गेंद, क्या करोडो़ं की जमीन पर नेता-अफसर की है नजर..?

पूर्वी चंपारण के मधुबन में जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित पक्ष की शिकायत के बाद डीजीपी के निर्देश पर चंपारण रेंज के डीआईजी हर किशोर राय ने घटनास्थल पहुंचकर जांच की।

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Viveka Nand
6 मिनट

Bihar News: बिहार पुलिस कई आपराधिक मामलों में तेजी नहीं दिखाती, पर जमीन संबंधी मामलों में गजब की तेजी दिखाती है. भूमि विवाद जहां पुलिस का अधिकार सीमित होता है, वहां पर भी पुलिस अधिक सक्रियता दिखाये तो सवाल उठना लाजिमी है. तब पुलिस की निष्पक्षता खतरे में पड़ जाती है. ऐसा ही मामला पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन से सामने आया है, जहां भाईयों के बीच जमीन बिक्री से संबंधित विवाद में केस दर्ज होने पर, एसडीपीओ ने सुपरविजन में गजब की तेजी दिखाई. ऐसी ही तेजी संवेदनशील मामलों में दिखाई जाय, तब समस्या का समाधान होते देर नहीं लगेगी. पीड़ित पक्ष ने जब वरीय अधिकारियों से शिकायत की, इसके बाद चंपारण रेंज के डीआईजी पूरे मामले की समीक्षा करने ऑन स्पॉट पहुंच गए. 

पुलिस ने जमीन विवाद में गजब की तेजी दिखाई  

चम्पारण रेंज के डीआईजी हर किशोर राय सोमवार की संध्या मधुबन थाना क्षेत्र स्थित विशुनपुर तारा ब्लाक रोड में पहुंचकर जमीनी विवाद से जुड़े मामले की जांच की.उन्होंने घटनास्थल एवं विवादित भूमि का निरीक्षण किया तथा आसपास के लोगों का बयान दर्ज कर मामले की जानकारी ली. मधुबन थाना कांड संख्या 138/26 में वादी सुरेश प्रसाद ने 5 अप्रैल 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी. पीड़ित पक्ष ने मधुबन पुलिस और एसडीपीओ पकड़ीदयाल की मूमिका पर सवाल उठाते हुए चंपारण रेंज के डीआईजी से निष्पक्ष जांच की मांग की. डीआईजी को दिए आवेदन में पीड़ित पक्ष ने कहा कि 5 अप्रैल 2026 को रात 8.30 बजे केस दर्ज किया जाता है, जिसमें जमीन संबंधी विवाद का मामला प्रतीत होना बताया गया है. इसके बाद दूसरे दिन यानि 6 तारीख को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पकड़ीदयाल द्वारा पर्यवेक्षण  किया जाना, गवाहों का बयान लिया जाना और 13 अप्रैल को पर्यवेक्षण टिप्पणी निर्गत किया गया. जमीनी विवाद के ऐसे मामले में हिंदू सह्दायिती के सह हिस्सेदारों द्वारा जमीन बेचे जाने के दीवानी मामले में केस को सत्य करार देते हुए, क्रेया –विक्रेता गवाह को अविलंब गिरफ्तार करने ,फरार रहने की स्थिति में कुर्की जब्ती करने का आदेश दिया जाना स्थानीय पुलिस और एसडीपीओ का इस केस पर स्पेशल ट्रीटमेंट स्पष्ट तौर पर दिख रही है. 

सिविल कोर्ट में चल रहा मामला...

डीईआईजी को दिए आवेदन में आगे बताया गया कि आखिर, पुलिस को इतनी जल्दीबाजी क्यों थी...? अनुसंधानक और एसडीपीओ पकड़ीदयाल द्वारा घटना स्थल वाले गांव के लोगों का बयान लिए बगैर, घटना स्थल पर दौर किये बिना ,सिविल कोर्ट में लंबित बंटवारा वाद सं- 475/22, अंचल कार्यालय के रजिस्टर-2 का अवलोकन किए बगैर ,तथा मामले की सच्चाई जाने बगैर सतही तौर पर टेबल वर्क कर कांड में प्राथमिकी अभियुक्त की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया. 

एक भाई ने दूसरे भाई-बहनो पर कर दिया केस, पुलिस ने केस को सत्य करार दे दिया  

दरअसल, मधुबन थाने में दर्ज केस सं- 138/26 में आवेदक ने आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी मां से 1 बीघा 9 कट्ठा 4 धूर जमीन की रजिस्ट्री कराई. इसी भूमि में से उनकी दो बहनों द्वारा करीब 5 कट्ठा जमीन की बिक्री कर दी गई. मामले में सुरेश प्रसाद ने अपने भाई हरिकिशोर प्रसाद, दो बहनों, जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों तथा गवाहों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करा दिया. इसके बाद आरोपित पक्ष हरिकिशोर प्रसाद ने एसपी, डीआईजी एवं डीजीपी को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके भाई ने उनकी मां से गलत तरीके से जमीन की रजिस्ट्री कराई है. डीजीपी के निर्देश पर डीआईजी ने घटनास्थल पहुंचकर मामले की जांच की. 

डीआईजी ने स्थानीय लोगों का बयान दर्ज किया....

डीआईजी हरि किशोर राय ने बताया कि जांच के दौरान स्थानीय लोगों का बयान दर्ज किया गया है तथा आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. साथ ही मामले के अनुसंधानकर्ता को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

महंगी जमीन पर नेता-अफसर की है नजर...

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस खेल में सिर्फ इतने लोग ही शामिल नहीं हैं. जमीन से संबंधित मामले में पुलिस इतनी तेजी दिखा रही, तो समझिए इसके पीछे बड़े लोग शामिल हैं. बताया जाता है कि जमीन पर क्षेत्र के बड़े लोगों की नजर है. एक 'माननीय' की विशेष नजर है. सिर्फ माननीय ही नहीं हाकिम की भी हिस्सेदारी बताई जा रही है. लिहाजा पुलिस काफी तेजी दिखा रही. जमीन संबंधी मामलों में जहां पुलिस का अधिकार सीमित है, इसके बाद भी पुलिस तेजी दिखा रही, समझिए दाल में काला नहीं, बल्कि दाल ही काली है. अब पूरा मामला चंपारण रेज के डीआईजी के पास पहुंच गया. ऐसे में पीड़ित परिवार को न्याय की पूरी आस जगी है. 

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता