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25 लाख के इनामी नक्सली ने किया सरेंडर, बिहार-झारखंड में दर्ज हैं 24 संगीन मामले

DESK : झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। 25 लाख के इनामी नक्सली विमल यादव उर्फ उमेश यादव उर्फ राधेश्याम ने शुक्रवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। रांची के डोरंडा स्थित क्ष

25 लाख के इनामी नक्सली ने किया सरेंडर, बिहार-झारखंड में दर्ज हैं 24 संगीन मामले
Mukesh Srivastava
2 मिनट

DESK : झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। 25 लाख के इनामी नक्सली विमल यादव उर्फ उमेश यादव उर्फ राधेश्याम ने शुक्रवार को पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। रांची के डोरंडा स्थित क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में झारखंड पुलिस, CRPF, झारखंड जगुआर व कोबरा बटालियन के अधिकारियों के सामने इनामी उग्रवादी ने हथियार डाल दिए।


25 लाख के इनामी नक्सली विमल यादव उर्फ उमेश यादव उर्फ राधेश्याम वर्ष 1993 में नक्सल संगठन से जुड़ा था। दस्ते में कुरियर बॉय के रूप में अपने काम की शुरूआत की और देखते ही देखते वह कुख्यात नक्सली बन गया। बिहार-झारखंड में इसके खिलाफ कुल 24 मामले दर्ज थे जिसमें 14 बड़े कांडों में यह शामिल रहा।


बिहार के जहानाबाद का रहने वाला विमल यादव नक्सली संगठन के नेता अरविंदम के साथ संगठन में शामिल हुआ था। वर्तमान में माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़ इलाके में उसका बड़ा खौफ था। यह उग्रवादी वर्ष 2005 में सब जोनल कमांडर बना। 2009 में जोनल कमांडर बना। 2011 में रीजनल सदस्य बना। 2014 में SAC सदस्य बना। दिसंबर 2018 में प्लाटून ERB बना । 2019 में सुधाकरण के जाने के बाद प्लाटून का चार्ज लिया।


उमेश यादव के घर का नाम राधेश्याम यादव था। जब संगठन से जुड़ा तो विमल यादव नाम दिया गया। वर्ष 1993 में वह इंटर का छात्र था। उस समय चचेरे भाई रामबालक प्रसाद यादव एवं बेचन यादव के साथ जमीन विवाद हुआ। इस वजह से वह मजदूर किसान संग्राम समिति में काम करने लगा। धीरे-धीरे वह उग्रवादियों के करीब होता चला गया। आत्मसमर्पण करने के बाद विमल ने बताया कि संगठन लक्ष्य से भटक गया है और वर्तमान में भाकपा माओवादी संगठन सिर्फ लेवी वसूलने वाला संगठन बनकर रह गया है।