UPSC Success Story Shambhavi Tiwari: जब कोई युवा UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू करता है, तो अक्सर उसके दिमाग में एक ही बात आती है—दिल्ली जाना पड़ेगा, महंगी कोचिंग करनी पड़ेगी और सालों तक उसी माहौल में रहना होगा। लेकिन शांभवी तिवारी ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर रणनीति सही हो, आत्मविश्वास मजबूत हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो घर बैठकर भी देश की सबसे कठिन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की जा सकती है।
बचपन से ही सेवा का सपना
पंतनगर की शांत वादियों में पली-बढ़ीं शांभवी का बचपन बेहद साधारण लेकिन प्रेरणादायक माहौल में बीता। महज चार महीने की उम्र से ही उनकी परवरिश उनके नाना-नानी के पास हुई। उनके नाना गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्लांट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख और एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक थे।
नाना को दिन-रात किसानों और फसलों के लिए काम करते देख शांभवी के मन में सेवा का भाव बचपन से ही बैठ गया था। उन्होंने बहुत जल्दी समझ लिया था कि समाज के लिए काम करना सिर्फ किताबों की बात नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। यही सोच आगे चलकर उन्हें सिविल सेवा की ओर ले गई।
इंजीनियरिंग से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
शांभवी ने अपनी स्कूली शिक्षा पंतनगर से पूरी की और फिर उसी यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पहली नजर में उनका करियर पूरी तरह तकनीकी क्षेत्र की ओर जाता दिख रहा था, लेकिन कॉलेज के दौरान ही उनका रुझान बदलने लगा।
उन्हें महसूस हुआ कि मशीनों से ज्यादा दिलचस्पी उन्हें लोगों, समाज और उनकी समस्याओं को समझने में है। यही कारण था कि जब UPSC की तैयारी शुरू की, तो उन्होंने अपने ऑप्शनल विषय के रूप में एंथ्रोपोलॉजी चुना। यह फैसला उनके लिए बेहद अहम साबित हुआ, क्योंकि इस विषय ने उन्हें समाज को गहराई से समझने का नजरिया दिया।
दो बार असफलता, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत
UPSC का सफर शांभवी के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। पहले दो प्रयासों में वह प्रीलिम्स तक भी नहीं निकाल पाईं। कई लोगों के लिए यह स्थिति हार मान लेने की होती है, लेकिन उन्होंने इसे अपने लिए एक सीख के रूप में लिया।
उन्होंने अपनी गलतियों को पहचाना। उन्हें एहसास हुआ कि वह पिछले वर्षों के सवालों को सिर्फ रट रही थीं, समझ नहीं रही थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। हर सवाल के हर विकल्प को समझना, उसके पीछे का कॉन्सेप्ट पकड़ना और उससे जुड़े अन्य टॉपिक्स को जोड़ना—यही उनकी नई तैयारी का आधार बना।
इस बदलाव का असर भी दिखा। जहां पहले उनके अंक 80-85 के आसपास रुक जाते थे, वहीं बाद में वह 100 के पार जाने लगे।
CSAT की एक गलती ने छीन लिया पूरा साल
जब तैयारी पटरी पर आने लगी थी, तभी एक और बड़ा झटका लगा। एक प्रयास में शांभवी CSAT पेपर में फेल हो गईं। उनका स्कोर सिर्फ 65 था। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के कारण उन्होंने CSAT को हल्के में लिया था, जिसकी कीमत उन्हें एक पूरा साल गंवाकर चुकानी पड़ी।
लेकिन उन्होंने इस गलती को भी अपनी ताकत बना लिया। अगले प्रयास में उन्होंने CSAT पर खास ध्यान दिया और इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
445वीं रैंक से 46वीं रैंक तक का सफर
तीसरे प्रयास में शांभवी ने शानदार वापसी की और 445वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के साथ उन्हें इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (IRMS) में चयन मिल गया। यह एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनका लक्ष्य इससे भी बड़ा था।
उन्होंने यहीं रुकने के बजाय एक और प्रयास किया। इस बार उनकी तैयारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी। उन्होंने अपने नोट्स को और बेहतर बनाया, आंसर राइटिंग पर खास ध्यान दिया और हर विषय को गहराई से समझा।
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने UPSC CSE 2025 में ऑल इंडिया 46वीं रैंक हासिल कर ली। यह सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि सालों की मेहनत और लगातार सुधार का परिणाम थी।
बिना कोचिंग, घर से ही बनाई सफलता की कहानी
आज के समय में जहां ज्यादातर छात्र दिल्ली जाकर कोचिंग लेना जरूरी मानते हैं, वहीं शांभवी ने इस ट्रेंड को तोड़ दिया। उन्होंने पूरी तैयारी घर से की और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया।
उनकी रणनीति बेहद स्पष्ट थी—
उन्होंने यूट्यूब और ऑनलाइन लेक्चर्स का उपयोग किया
पिछले वर्षों के प्रश्नों का गहराई से विश्लेषण किया
टेस्ट सीरीज के जरिए खुद को परखा
नोट्स को लगातार अपडेट किया
इंटरव्यू की तैयारी और मेंटरशिप
इंटरव्यू के लिए उन्होंने कई मॉक इंटरव्यू दिए, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इस दौरान उन्हें महेश भागवत जैसे अनुभवी अधिकारी का मार्गदर्शन भी मिला। इससे उन्हें अपने DAF (डिटेल्ड एप्लीकेशन फॉर्म) को बेहतर बनाने और पर्सनैलिटी टेस्ट के लिए खुद को तैयार करने में मदद मिली।
तनाव से निपटने के अनोखे तरीके
UPSC की तैयारी सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होती है। शांभवी ने इस दौरान खुद को संतुलित रखने के लिए कुछ खास तरीके अपनाए। वह कच्छ की प्रसिद्ध लिपन आर्ट करती थीं, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती थी। इसके अलावा उन्होंने अपनी छत पर एक छोटा किचन गार्डन भी बनाया हुआ था। जब भी पढ़ाई से ब्रेक चाहिए होता, वह डांस करती थीं।
कैसी अफसर बनना चाहती हैं शांभवी
शांभवी का लक्ष्य सिर्फ एक अफसर बनना नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील और जिम्मेदार अधिकारी बनना है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। वह खास तौर पर महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण पर काम करना चाहती हैं। उनका मानना है कि अगर महिलाओं को सही शिक्षा और अवसर मिल जाएं, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
युवाओं के लिए सीख
शांभवी तिवारी की कहानी हर उस युवा के लिए एक प्रेरणा है, जो UPSC की तैयारी कर रहा है या जीवन में किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहता है। उनकी सफलता यह सिखाती है कि—
असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत होती है
रणनीति बदलने से परिणाम बदलते हैं
हर विषय को समझना जरूरी है, सिर्फ रटना नहीं
कोचिंग जरूरी नहीं, सही दिशा जरूरी है
और सबसे महत्वपूर्ण—खुद पर भरोसा कभी नहीं खोना चाहिए
शांभवी ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो छोटे शहर से निकलकर भी देश की सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता हासिल की जा सकती है।

