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MBBS छात्रों के लिए बड़ी राहत! डॉक्टर बनने के लिए अब मिलेगा 10 साल का समय, NMC का नया ड्राफ्ट जारी

MBBS Students: मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने MBBS कोर्स और इंटर्नशिप पूरा करने की अधिकतम समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव जारी किया है। अगर यह ड्राफ्ट लागू होता है, तो छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के लिए...

MBBS छात्रों के लिए बड़ी राहत! डॉक्टर बनने के लिए अब मिलेगा 10 साल का समय, NMC का नया ड्राफ्ट जारी
Ramakant kumar
2 मिनट

MBBS Students: देशभर के मेडिकल छात्रों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। मेडिकल शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एमबीबीएस कोर्स पूरा करने की अधिकतम समय सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अगर यह ड्राफ्ट मंजूर हो जाता है, तो अब छात्रों को MBBS और अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करने के लिए 9 साल की जगह 10 साल तक का समय मिलेगा।


एनएमसी ने इस संबंध में ‘स्नातक चिकित्सा शिक्षा (संशोधन) विनियम, 2026’ का मसौदा जारी किया है। इसके तहत साल 2023 के नियमों में संशोधन कर मेडिकल छात्रों को अतिरिक्त एक वर्ष का मौका देने की तैयारी की गई है। यह फैसला उन छात्रों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी पढ़ाई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, पारिवारिक परिस्थितियों या अन्य कारणों से बीच में प्रभावित हो जाती है।


नए प्रस्ताव के मुताबिक, एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ-साथ अनिवार्य रोटेटरी मेडिकल इंटर्नशिप (CRMI) भी इसी 10 साल की अवधि में शामिल रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों पर पढ़ाई पूरी करने का दबाव कम होगा और उन्हें अपना कोर्स बिना जल्दबाजी के पूरा करने का अवसर मिलेगा।


हालांकि, एनएमसी ने साफ कर दिया है कि समय सीमा बढ़ाने का मतलब शैक्षणिक नियमों में ढील देना नहीं है। फर्स्ट प्रोफेशनल MBBS परीक्षा पास करने के लिए अधिकतम चार प्रयासों की सीमा पहले की तरह लागू रहेगी। यानी पहले वर्ष की परीक्षा छात्रों को निर्धारित प्रयासों के भीतर ही पास करनी होगी।


फिलहाल यह सिर्फ एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है और इसे अंतिम रूप देने से पहले एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों, डॉक्टरों, शिक्षकों, छात्रों और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। इच्छुक लोग 27 जून 2026 तक अपनी राय और सुझाव भेज सकते हैं। सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद ही इस नियम को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।


यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा और हजारों छात्रों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।