ब्रेकिंग
पटना में जाम से त्राहिमाम, शपथ ग्रहण और पीएम मोदी के रोड शो को लेकर कई रूट डायवर्ट; लोगों की बढ़ी परेशानीबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं इंजीनियर कुमार शैलेंद्र? जो सम्राट सरकार में बनने जा रहे मंत्रीशपथ ग्रहण से पहले पूर्व सीएम नीतीश कुमार पर रोहिणी आचार्य का तीखा तंज, बीजेपी को भी घेराबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं डॉ. श्वेता गुप्ता? जो पहली बार बनने जा रही हैं मंत्री, कई नए चेहरों को मौकाकैबिनेट विस्तार से पहले बजरंगबली के दरबार में शाह-सम्राट: पटना के राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चनापटना में जाम से त्राहिमाम, शपथ ग्रहण और पीएम मोदी के रोड शो को लेकर कई रूट डायवर्ट; लोगों की बढ़ी परेशानीबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं इंजीनियर कुमार शैलेंद्र? जो सम्राट सरकार में बनने जा रहे मंत्रीशपथ ग्रहण से पहले पूर्व सीएम नीतीश कुमार पर रोहिणी आचार्य का तीखा तंज, बीजेपी को भी घेराबिहार कैबिनेट विस्तार: कौन हैं डॉ. श्वेता गुप्ता? जो पहली बार बनने जा रही हैं मंत्री, कई नए चेहरों को मौकाकैबिनेट विस्तार से पहले बजरंगबली के दरबार में शाह-सम्राट: पटना के राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना

Success Story: कभी पंखे बेचकर किया था पिता का अंतिम संस्कार, आज ₹157 करोड़ की कंपनी की हैं मालिक: जानिए पूरी कहानी

कभी पिता के अंतिम संस्कार के लिए घर का पंखा मात्र 170 रुपये में बेचना पड़ा था। हालात इतने कठिन थे कि भविष्य अंधकारमय लग रहा था। लेकिन उसी घर की बेटी ने हार नहीं मानी। आज वही सीमा बंसल ₹157 करोड़ की कंपनी की मालिक हैं। आखिर कैसे बदली उनकी किस्मत?

Success Story: कभी पंखे बेचकर किया था पिता का अंतिम संस्कार, आज ₹157 करोड़ की कंपनी की हैं मालिक: जानिए पूरी कहानी
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

Success Story:  “सीढ़ियां उन्हें मुबारक, जिन्हें छत तक जाना है, जिनका मंजिल है आसमान, उन्हें रास्ता खुद बनाना है।”  इन पंक्तियों को सच कर दिखाया ग्वालियर की रहने वाली सीमा बंसल ने। उनका बचपन बेहद कठिन हालात में बीता, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय मेहनत का रास्ता चुना। आज उनकी कंपनी DCG Tech Limited ₹157 करोड़ का कारोबार कर रही है और पैकेजिंग इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी है।


170 रुपये में बिका घर का पंखा

सीमा जब सिर्फ डेढ़ साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे।


उनकी मां ने घर का एकमात्र सीलिंग फैन 170 रुपये में बेच दिया और उसी पैसे से अंतिम संस्कार किया। पिता के जाने के बाद मां ने अकेले चार बच्चों की जिम्मेदारी संभाली। वे संगीत सिखाकर घर चलाती थीं।


शुरुआत में बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाया गया, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण सीमा को सरकारी स्कूल में डालना पड़ा। नए माहौल में उन्हें काफी मुश्किल हुई। छह महीने तक वे स्कूल नहीं गईं, लेकिन जब लौटीं तो अपनी कक्षा में टॉप किया।


मुंबई की झोपड़ी से लंदन तक का सफर

बड़े होने पर सीमा अपने भाई के साथ मुंबई आ गईं। उन्हें उम्मीद थी कि रिश्तेदारों का सहारा मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे एक छोटी टिन की झोपड़ी में रहने लगीं, जहां गर्मियों में बहुत परेशानी होती थी।


उन्होंने कई छोटे-मोटे काम किए और फिर एक आईटी कंपनी में नौकरी मिली। यही नौकरी उनके जीवन का बड़ा मोड़ बनी। उन्हें लंदन ऑफिस में काम करने का मौका मिला और उन्होंने यह अवसर स्वीकार किया।


लंदन में काम के दौरान उनकी शादी हुई। बाद में उनके पति अमेरिका चले गए और वॉल स्ट्रीट पर ऑफिस खोला। बिजनेस अच्छा चल रहा था, ग्रीन कार्ड मिल गया था और जीवन स्थिर हो चुका था। लेकिन अचानक बिजनेस में भारी नुकसान हुआ और परिवार को सब कुछ छोड़कर भारत लौटना पड़ा।


घर के डेस्क से शुरू हुआ पैकेजिंग बिजनेस

भारत लौटने के बाद सीमा बेरोजगार थीं। लंदन में उन्हें हर महीने पैकेजिंग का एक कैटलॉग मिलता था। वहीं से उन्हें पैकेजिंग इंडस्ट्री में काम शुरू करने का विचार आया।


बिना अनुभव और बिना बड़ी पूंजी के उन्होंने घर के एक छोटे से डेस्क से काम शुरू किया। वे खुद गाड़ी चलाती थीं, ऑर्डर लेती थीं, सामान बेचती थीं, हिसाब-किताब रखती थीं और ग्राहकों से संपर्क करती थीं।


धीरे-धीरे उनका काम बढ़ने लगा। उन्होंने क्वालिटी और भरोसे को प्राथमिकता दी। उनकी कंपनी 50,000 से ज्यादा ग्राहकों को आधुनिक और टिकाऊ पैकेजिंग सॉल्यूशंस देने लगी। कारोबार भारत के साथ-साथ यूएई तक फैल गया।


आज DCG Tech Limited ₹157 करोड़ का टर्नओवर हासिल कर चुकी है और पैकेजिंग इंडस्ट्री में एक मजबूत नाम बन चुकी है।

संबंधित खबरें