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Success Story: बच्चे को गोद में लेकर लिखा UPSC मेन्स एग्जाम, जानिए...मालविका नायर की सफलता की कहानी

Success Story: मालविका जी नायर ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 45वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ राज्य में टॉप किया, बल्कि पूरे देश में लाखों युवाओं खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं.

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा को भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है, लेकिन अगर हौसला मजबूत हो और लक्ष्य साफ़ हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। केरल के तिरुवल्ला की रहने वाली मालविका जी नायर ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 45वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ राज्य में टॉप किया, बल्कि पूरे देश में लाखों युवाओं खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।


मालविका की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने UPSC मेन्स परीक्षा उस समय दी, जब वह एक नवजात शिशु की मां थीं। उन्होंने 3 सितंबर 2024 को बेटे आदिसेश को जन्म दिया और मात्र 17 दिन बाद, 20 सितंबर 2024 को UPSC मेन्स परीक्षा दी।


मालविका कहती हैं, मेन्स परीक्षा मेरे लिए किसी युद्ध से कम नहीं थी। एक नवजात की देखरेख के बीच पढ़ाई, फोकस और खुद को मानसिक रूप से संभालना आसान नहीं था। मालविका 2020 बैच की IRS अधिकारी हैं और वर्तमान में कोच्चि में इनकम टैक्स डिप्टी कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। यह UPSC में उनका छठा और अंतिम प्रयास था और इस बार उन्होंने अपनी मंजिल को IAS बनकर पा ही लिया।


मालविका बताती हैं कि इस कठिन यात्रा में उनका परिवार, खासतौर पर उनके पति डॉ. एम. नंदगोपन (IPS अधिकारी), माता-पिता और बहन ने हर कदम पर उनका साथ दिया। पिता के. जी. अजित कुमार (रिटायर्ड AGM, केरल फाइनेंशियल कॉरपोरेशन) और मां डॉ. गीतालक्ष्मी (गायनेकोलॉजिस्ट) परीक्षा के दौरान बच्चे को एग्जाम सेंटर तक लेकर जाते थे, ताकि मालविका उसे बीच-बीच में दूध पिला सकें।


यहां तक कि इंटरव्यू के दिन भी उनका चार महीने का बेटा दिल्ली लाया गया था, ताकि उसकी देखभाल हो सके। यह पहली बार नहीं है जब मालविका ने UPSC में सफलता हासिल की हो। 2019 में उन्होंने 118वीं रैंक और 2022 में 172वीं रैंक प्राप्त की थी। उनके पति नंदगोपन ने भी 2022 में 233वीं रैंक के साथ UPSC पास किया था।


मालविका की यह कहानी सिर्फ एक सफलता की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, पारिवारिक समर्थन और मातृत्व के साथ संतुलन की मिसाल है। वो कहती हैं, अगर आपके पास लक्ष्य है, परिवार का साथ है और आप दिल से मेहनत करते हैं, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उनकी सफलता हमें यह सिखाती है कि UPSC जैसी परीक्षा में केवल रैंक ही नहीं, जज्बा, धैर्य और प्रेरणा भी अहम होती है।