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बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के एक छोटे से गांव बलुआ सरैया की रहने वाली आभा शर्मा ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी झुक जाते हैं।

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Tejpratap
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SUCCESS STORY: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के एक छोटे से गांव बलुआ सरैया की रहने वाली आभा शर्मा ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी झुक जाते हैं। अभावों में पली-बढ़ी आभा ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी नौकरी छोड़कर गांव की महिलाओं के लिए काम करने का रास्ता चुना। आज उनका सैनिटरी पैड और डायपर ब्रांड ‘Elissa’ देशभर में अपनी पहचान बना चुका है और करोड़ों का कारोबार कर रहा है।  


लालटेन की रोशनी में पढ़ाई

आभा का बचपन आसान नहीं था। गांव में बिजली की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्होंने दीये और ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई की। स्कूल जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। जिस माहौल में बेटियों की पढ़ाई से ज्यादा शादी की चिंता की जाती थी, वहां आभा ने आगे बढ़ने का सपना देखा।

परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। माता-पिता जल्दी शादी कर देना चाहते थे, लेकिन उनके बड़े भाई ने उनका साथ दिया। भाई के समर्थन से उन्होंने एमबीए तक की पढ़ाई पूरी की और खुद को आगे बढ़ने के लिए तैयार किया।


नौकरी छोड़कर चुना अलग रास्ता

एमबीए करने के बाद आभा के पास अच्छी नौकरी के अवसर थे। वे चाहतीं तो किसी बड़ी कंपनी में आरामदायक जीवन जी सकती थीं। लेकिन उन्होंने गांव लौटकर कुछ अलग करने का फैसला किया। उन्होंने देखा कि ग्रामीण इलाकों में महिलाएं स्वास्थ्य और स्वच्छता के मामले में जागरूक नहीं हैं। खासकर मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं होती थी।


विरोध और अपमान का सामना

जब आभा ने गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाना शुरू किया, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने उनकी सोच का मजाक उड़ाया। जातिवादी टिप्पणियां की गईं। उनके लगाए पोस्टर और बैनर तक फाड़ दिए गए। लेकिन आभा ने हार नहीं मानी। उन्होंने नकारात्मक बातों को अपनी ताकत बनाया और लगातार आगे बढ़ती रहीं।


60 हजार से शुरू हुआ सफर

आभा ने महज 60 हजार रुपये की पूंजी से अपना काम शुरू किया। शुरुआत में संसाधन कम थे, लेकिन हौसला बड़ा था। धीरे-धीरे उनका ब्रांड ‘Elissa Sanitary Pad & Diaper’ पहचान बनाने लगा। आज यह ब्रांड बिहार से निकलकर देश के कई राज्यों तक पहुंच चुका है।

उनकी कंपनी अब करोड़ों रुपये का टर्नओवर कर रही है। साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। जो महिलाएं पहले घर तक सीमित थीं, आज वे कमाई कर रही हैं और अपने परिवार का सहारा बन रही हैं।


सम्मान और प्रेरणा

आभा शर्मा को उनके काम के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें भारत एंटरप्रेन्योर अवार्ड, बिहार चेंज मेकर अवार्ड और गार्गी नारी शक्ति अवार्ड जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया है।

आज वे सिर्फ एक सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। आर्थिक तंगी और सामाजिक बाधाओं को पीछे छोड़कर उन्होंने यह दिखा दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो किसी भी छोटे गांव से निकलकर बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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Tejpratap

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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