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Success Story: मजदूर का बेटा बना देश का सबसे युवा IPS, जानिए... सफीन हसन की प्रेरणादायक कहानी

Success Story: गरीबी और संघर्ष के बावजूद सफीन हसन ने 22 साल की उम्र में UPSC पास कर देश के सबसे युवा IPS अफसर बनने का गौरव हासिल किया। उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story: देश में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो दिल को छू लेने के साथ-साथ इंसान को हौसले की नई परिभाषा भी सिखा जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है गुजरात के पालनपुर के रहने वाले सफीन हसन की, जो एक साधारण मजदूर परिवार से निकलकर भारत के सबसे युवा IPS अफसर बने।


साफ दिल, सच्चा इरादा और बुलंद हौसलों के साथ सफीन हसन ने UPSC जैसी कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा पास की। उनका जन्म 21 जुलाई 1995 को पालनपुर, बनासकांठा (गुजरात) में हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके माता-पिता हीरा उद्योग में काम करते थे, लेकिन साल 2000 में नौकरियां चली गईं। इसके बाद उनकी मां ने दूसरों के घरों में खाना बनाना शुरू किया और पिता ईंटें ढोकर परिवार का पेट पालने लगे। शाम को दोनों मिलकर उबले अंडे का ठेला भी लगाते थे।



बचपन में ही सफीन का सपना बड़ा था। जब एक कलेक्टर उनके स्कूल आए, तब उनके दिल में IAS बनने की लौ जल उठी। आर्थिक तंगी के बावजूद स्कूल ने 11वीं और 12वीं की फीस माफ कर दी। आगे की पढ़ाई में रिश्तेदारों ने सहयोग किया और सफीन ने Sardar Vallabhbhai National Institute of Technology (SVNIT), सूरत से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की।



इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी। साल 2017 में, परीक्षा देने जाते वक्त उनका गंभीर सड़क हादसा हो गया। सिर, घुटनों और हाथ में चोटें आईं, लेकिन उन्होंने घायल हालत में ही परीक्षा दी। इसके बाद कई सर्जरी और महीनों की फिजियोथेरेपी से गुज़रे, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।


अगले ही प्रयास में सफीन हसन ने UPSC 2017 में ऑल इंडिया रैंक 570 हासिल की और महज 22 साल की उम्र में IPS बने। उन्हें गुजरात कैडर आवंटित हुआ।


आज सफीन न केवल एक अफसर हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं और अपनी कहानी, संघर्ष और पढ़ाई के टिप्स शेयर करते हैं। कई TEDx टॉक्स और मोटिवेशनल सेशंस में उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया है, "हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे नेक हों और जुनून सच्चा हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं।"

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