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मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला, साक्ष्य के अभाव में 6 आरोपी बरी

मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके चालक रोहित कुमार की दोहरे हत्याकांड में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में छह आरोपियों को बरी कर दिया। यह फैसला करीब साढ़े सात साल पुराने मामले में आया है।

बिहार न्यूज
साढ़े 7 साल बाद सभी आरोपी बरी
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

MUZAFFARPUR:बिहार के बहुचर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर रोहित कुमार की दोहरे हत्याकांड में गुरुवार को बड़ा फैसला आया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया। करीब साढ़े 7 साल पुराने इस मामले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।


गौरतलब है कि 23 सितंबर 2018 को चंदवारा के नवाब रोड के पास बाइक सवार हमलावरों ने पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके चालक रोहित कुमार की कार पर AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी थी।


मामले में श्यामनंदन मिश्रा, सुशील कुमार छापड़िया, मृत्युंजय कुमार उर्फ पिंटू सिंह, नवीन कुमार, सुजीत कुमार और ओंकार सिंह उर्फ रंजय पर ट्रायल चला। ट्रायल के दौरान एक आरोपी गोविंद शर्मा की हत्या हो चुकी थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाह पेश किए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं माना।


इस मामले में पुलिस ने कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया था। पूरक चार्जशीट के आधार पर राजू तुरहा, शंभू सिंह और प्रद्युम्न शर्मा उर्फ मंटू शर्मा के खिलाफ अलग से ट्रायल अभी भी जारी है। इस ट्रायल में पूर्व मेयर के पुत्र तुषार भारद्वाज समेत 5 गवाहों की गवाही हो चुकी है और अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।


पब्लिक प्रोसिक्यूटर अजय कुमार ने फैसले के बाद कहा कि पुलिस जांच में गंभीर कमियां रहीं। उनके मुताबिक, मृतक का जब्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए नहीं भेजा गया। यदि कॉल डिटेल और मोबाइल डेटा की सही तरीके से जांच होती तो आरोपियों के खिलाफ अहम साक्ष्य मिल सकते थे।


उन्होंने यह भी कहा कि घटना के प्रत्यक्षदर्शी अदालत में खुलकर गवाही नहीं दे सके। आशंका है कि कई गवाह अपराधियों के डर या दबाव में अपने बयान पर कायम नहीं रह सके। वहीं, परिवार के सदस्य भी घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे, इसलिए वे घटना के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी अदालत को नहीं दे सके।


अजय कुमार ने कहा कि मामले के मुख्य शूटर बताए जा रहे आरोपी की भी बाद में हत्या हो चुकी है। उन्होंने माना कि अनुसंधान में हुई कमियों का लाभ आरोपियों को मिला, जिसके कारण अदालत ने सभी छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि पूरक चार्जशीट वाले मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ ट्रायल अभी जारी है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता