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Bihar Politics : मेरी तरह विधायक बनकर 70 मुकदमे झेलने की ताकत है या नहीं? बेटे के चुनाव लड़ने पर अनंत सिंह का बेबाक जवाब, बोले- फैसला उसी को लेना है

मोकामा में उपचुनाव हुआ तो क्या अनंत सिंह के बड़े बेटे चुनावी मैदान में उतरेंगे? इस सवाल पर छोटे सरकार ने 70 मुकदमों का जिक्र कर ऐसा जवाब दिया कि बिहार की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।

Bihar Politics : मेरी तरह विधायक बनकर 70 मुकदमे झेलने की ताकत है या नहीं? बेटे के चुनाव लड़ने पर अनंत सिंह का बेबाक जवाब, बोले- फैसला उसी को लेना है
Tejpratap
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Bihar Politics : बिहार की राजनीति में अपने बेबाक अंदाज और दबंग छवि के लिए चर्चित मोकामा के विधायक अनंत सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। इस बार सवाल उनके राजनीतिक भविष्य या किसी सियासी विरोधी को लेकर नहीं, बल्कि उनके बड़े बेटे के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर था। मोकामा में अगर विधानसभा का उपचुनाव होता है तो क्या उनके बड़े बेटे चुनाव लड़ेंगे? इस सवाल पर अनंत सिंह ने ऐसा जवाब दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। 

अनंत सिंह ने बेटे के चुनाव लड़ने की संभावना पर सीधे तौर पर कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने साफ कहा कि बेटे को चुनाव लड़ना है या नहीं, यह फैसला उसी को करना है। लेकिन उनके जवाब का सबसे दिलचस्प हिस्सा वह था, जिसमें उन्होंने अपनी राजनीतिक जिंदगी और अपने ऊपर दर्ज मुकदमों का जिक्र किया। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि अगर बेटा उनकी तरह विधायक बनकर अपने ऊपर 70 मुकदमे दर्ज करवाने की ताकत रखता है या नहीं, इसका हिसाब-किताब उसे खुद लगाना होगा।

'मेरी तरह 70 मुकदमे झेलने की ताकत है या नहीं, यह उसे तय करना है'

मोकामा विधायक से जब पूछा गया कि अगर क्षेत्र में विधानसभा का उपचुनाव होता है तो क्या उनके बड़े बेटे चुनाव मैदान में नजर आएंगे? इस पर अनंत सिंह ने कहा, "बेटा को लेकर हम कुछ नहीं बोलेंगे। उसको चुनाव में उतरने का मन है या नहीं, यह उसके ऊपर निर्भर करता है।"

उन्होंने आगे अपने अंदाज में कहा कि अगर बेटा उनकी तरह विधायक बनकर अपने ऊपर 70 मुकदमे दर्ज करवाने की ताकत रखता है या नहीं, इसका हिसाब-किताब उसे खुद लगाना होगा। वह अब कोई बच्चा नहीं है कि उसके भविष्य का फैसला कोई दूसरा करे।

अनंत सिंह के इस बयान में एक तरफ बेटे को अपनी मर्जी से राजनीतिक रास्ता चुनने की आजादी देने की बात दिखी, तो दूसरी तरफ उनके अपने राजनीतिक सफर की मुश्किलों और विवादों की झलक भी नजर आई। 70 मुकदमों का जिक्र कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीति में उतरना केवल चुनाव लड़ना और विधायक बनना नहीं है, बल्कि इसके साथ कई तरह की चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है।

'हमारा काम पढ़ाना-लिखाना था, वह हमने कर दिया'

अनंत सिंह ने बेटे के भविष्य को लेकर अपनी जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि उनका काम बेटे को पढ़ाना-लिखाना था, जिसे उन्होंने पूरा कर दिया है। अब आगे उसे क्या करना है, यह फैसला लेने का अधिकार उसी का है।उनके मुताबिक, बेटा समझदार है और अब अपने फैसले खुद ले सकता है। इसलिए वह उस पर चुनाव लड़ने या राजनीति में आने का कोई दबाव नहीं बनाएंगे।

उनके इस बयान से यह भी स्पष्ट है कि फिलहाल उन्होंने अपने बड़े बेटे की मोकामा से उम्मीदवारी को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। उन्होंने न तो बेटे के चुनाव लड़ने की पुष्टि की और न ही इस संभावना को पूरी तरह खारिज किया। यानी मोकामा की सियासत में बेटे की एंट्री का रास्ता खुला है, लेकिन अंतिम फैसला उसी के हाथ में होगा।

मोकामा में उपचुनाव की चर्चा के बीच बढ़ी सियासी दिलचस्पी

दरअसल, मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह के परिवार का खास प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके बड़े बेटे के संभावित चुनावी मैदान में उतरने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर भविष्य में मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनती है तो वहां किस चेहरे को मैदान में उतारा जाएगा, इस पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

अनंत सिंह के बयान ने इस चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने बेटे की राजनीतिक संभावनाओं पर बात करते हुए अपनी विधायकी, संघर्ष और मुकदमों का जिक्र कर दिया।  उनके बयान का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही है कि पिता होने के नाते उन्होंने बेटे को शिक्षा दी है, लेकिन राजनीति में उतरने का फैसला उस पर छोड़ दिया है। 

अब देखना होगा कि अनंत सिंह का बड़ा बेटा अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालने के लिए मोकामा के चुनावी मैदान में उतरता है या फिर राजनीति से अलग अपनी राह चुनता है। फिलहाल अनंत सिंह के इस बयान ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है- क्या मोकामा में अगली राजनीतिक पारी छोटे सरकार के बेटे खेलेंगे या फिर परिवार की सियासी विरासत को लेकर फैसला अभी बाकी है?