Patna News: इंटरनेशनल स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट, पटना के कंप्यूटर एप्लीकेशन्स विभाग द्वारा चेयरमैन, श्री समरेन्द्र सिंह, वाईस चेयरमैन, श्री देवल सिंह एवं सचिव श्री अमल सिंह के संरक्षण एवं नेतृत्व में "इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग, इनोवेशन एंड रेज़िलिएस" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। इस सम्मेलन में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, विद्वानों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सम्मेलन के दौरान आयोजित दो तकनीकी सत्रों में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें उभरती तकनीकों एवं डिजिटल नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई। सम्मेलन में प्रस्तुत 60 चयनित शोध-पत्रों से संकलित तथा आईएसबीएन युक्त सम्मेलन पुस्तक "इंटेलिजेंट कंप्यूटिंग, इनोवेशन एंड रेज़िलिएस" के आवरण पृष्ठ का भी गणमान्य अतिथियों द्वारा लोकार्पण किया गया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), पटना के डिजिटल गवर्नमेंट रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. शैलेश श्रीवास्तव उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पटना के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर, श्री प्रभात कुमार, वी.के.एस.यू., आरा के कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट फैकल्टी एवं मशीन लर्निंग विशेषज्ञ, डॉ. एम.डी. शम्स रज़ा, श्री राकेश कुमार, हेड एडमिनिस्ट्रेशन/एचआर एवं हेड मटेरियल मैनेजमेंट, सी-डैक पटना, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार, तथा श्री रौशन कुमार, एक एआई उद्यमी, मौजूद रहे।
सम्मेलन के चेयरपर्सन एवं आईएसएम पटना के निदेशक, प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के समाधान में इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग, नवाचार-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र एवं मजबूत डिजिटल फ्रेमवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने सतत एवं नैतिक तकनीकी विकास के लिए अंतःविषयक शोध और अकादमिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग एवं डिजिटल गवर्नेस की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक सार्वजनिक प्रशासन को अधिक प्रभावी, नागरिक-केंद्रित सेवाओं को अधिक सुलभ तथा तकनीकी अवसंरचनाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को नवाचार-आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.डी. शम्स रज़ा ने कृत्रिम बुद्धिमता (AI), मशीन लर्निंग, इंटेलिजेंट सिस्टम्स एवं डेटा-आधारित नवाचारों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने तकनीकी विकास में नैतिकता, शोध उत्कृष्टता तथा उद्योग एवं अकादमिक संस्थानों के सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
उद्घाटन सत्र का समापन सम्मेलन के संयोजक एवं कंप्यूटर एप्लीकेशन्स विभागाध्यक्ष, प्रो. राजेश्वर दयाल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, शोधकर्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजन समिति, संकाय समन्वयकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कम्प्यूटिंग, डेटा एनालिटिक्स, स्मार्ट टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन एवं सतत कम्प्यूटिंग जैसी समकालीन विषय-वस्तुओं पर शोध प्रस्तुत किए गए। देश के विभिन्न संस्थानों से आए शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने नवीन विचारों, शोध निष्कर्षों एवं भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की। प्रतिभागियों ने सम्मेलन के हाइब्रिड मोड की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों के बीच सार्थक अकादमिक संवाद को बढ़ावा मिला।
सम्मेलन का आयोजन आईएसएम पटना के निदेशक, प्रो. (डॉ.) संदीप कुमार, डीन एवं प्राचार्य प्रो. (डॉ.) विवेका नंद शर्मा, अकादमिक हेड, प्रो. (डॉ.) स्वेता रानी तथा एडमिन, नीरू कुमारी के अकादमिक मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने आयोजन टीम को प्रेरित करते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच गुणवत्तापूर्ण शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया।
सम्मेलन के संयोजक प्रो. दयाल ने अपने संबोधन में कहा कि इंटेलिजेंट कम्प्यूटिंग और सुदृढ़ डिजिटल नवाचार अब केवल वैकल्पिक क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि शिक्षा, उद्योग, शासन व्यवस्था और समाज के भविष्य को आकार देने वाले अनिवार्य स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं युवा शोधार्थियों को एक सशक्त अकादमिक मंच प्रदान करना है, जहाँ वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा तथा सतत तकनीकी समाधानों से जुड़ी उभरती प्रवृत्तियों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श कर सकें। प्रो. दयाल ने आगे कहा कि तीव्र गति से विकसित हो रहे डिजिटल परिवेश में नवाचार को सदैव नैतिक उत्तरदायित्व, समावेशिता और मानव-केंद्रित मूल्यों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सार्थक एवं सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यक्रम का सफल संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर, श्रीमती स्वाति सवर्ण एवं सुश्री रगदाह जावेद द्वारा किया गया। सम्मेलन की वैलिडिक्टरी रिपोर्ट असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. शताक्षी श्रीवास्तव द्वारा व्यापक रूप से प्रस्तुत की गई, जिसमें सम्मेलन के दौरान हुई प्रमुख चर्चाओं, शोध-पत्र प्रस्तुतियों तथा कार्यक्रम से प्राप्त महत्वपूर्ण निष्कर्षों को विस्तारपूर्वक रेखांकित किया गया। सम्मेलन का सफल आयोजन एक बार फिर इंटरनेशनल स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट, पटना की अकादमिक उत्कृष्टता, तकनीकी उन्नति, शोध सहयोग एवं नवाचार-आधारित शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।







