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Success Story: “एक दिन तू अफसर बनेगी…”, 5 साल की उम्र में माता-पिता को खोया, फिर भी नहीं मानी हार; कड़ी मेहनत से बनीं IPS अधिकारी

Success Story: यह कहानी उस लड़की की है, जिसने ज़िंदगी के सबसे कठिन मोड़ पर भी हार नहीं मानी। आईपीएस अंशिका जैन ने केवल 5 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन उनकी दादी ने मां और पिता दोनों का प्यार देकर उन्हें संभाला।

Success Story
सफलता की कहानी
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story: यह कहानी उस लड़की की है, जिसने ज़िंदगी के सबसे कठिन मोड़ पर भी हार नहीं मानी। दिल्ली में जन्मी आईपीएस अंशिका जैन ने केवल 5 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन उनकी दादी ने मां और पिता दोनों का प्यार देकर उन्हें संभाला। यही दादी उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनीं और उन्होंने ही अंशिका के भीतर एक सपना बोया “एक दिन तू अफसर बनेगी।”


अंशिका की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। बचपन में अनाथ होने का दर्द, फिर आर्थिक मुश्किलें और पढ़ाई का दबाव — लेकिन इन सबके बीच उन्होंने कभी खुद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से बी.कॉम की डिग्री ली और एम.कॉम की पढ़ाई के दौरान ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। नौकरी के आकर्षक प्रस्ताव को ठुकराकर उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिविल सर्विस परीक्षा पर लगाया।


लेकिन यह रास्ता बिल्कुल आसान नहीं था। चार बार असफलता ने उन्हें कई बार तोड़ा, मगर दादी के सपने ने उन्हें हर बार दोबारा खड़ा कर दिया। दुर्भाग्य से, 2019 में उनकी दादी का निधन हो गया, ठीक उसी समय जब वह परीक्षा की तैयारी में जुटी थीं। इस गहरे दुख को उन्होंने अपनी प्रेरणा बना लिया। आखिरकार, 5वें प्रयास में अंशिका जैन ने यूपीएससी 2022 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 306 हासिल कर ली और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में चयनित हुईं।


उनकी सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि हिम्मत और समर्पण के साथ कोई भी व्यक्ति किस्मत को बदल सकता है। आज आईपीएस अंशिका जैन न सिर्फ एक अधिकारी हैं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो मुश्किल हालात में भी अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखते हैं।


साल 2023 में अंशिका ने आईएएस अधिकारी वासु जैन से विवाह किया। दोनों अब समाज में बदलाव और सेवा के मिशन पर एक साथ काम कर रहे हैं। अंशिका की कहानी यह संदेश देती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, यदि विश्वास और मेहनत कायम रहे, तो सफलता निश्चित है।

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