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CBSC 2026 : 2026 से CBSE बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल जांच और AI का बड़ा इस्तेमाल, जाने अब कैसे होगा कॉपियों का जांच

CBSC 2026: सीबीएसई अब 2026 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई कॉपी जांच प्रणाली शुरू करने जा रहा है। इसका मकसद है कि कॉपी जांच और भी ज्यादा सही और तेज़ हो। पिछले कुछ सेशन्स में जब इस तकनीक को ट्रायल में इस्तेमाल किया गया, जिसके की अच्छे रिजल्ट्

CBSC 2026 : 2026 से CBSE बोर्ड परीक्षाओं में डिजिटल जांच और AI का बड़ा इस्तेमाल, जाने अब कैसे होगा कॉपियों का जांच
CBSC 2026
© Google
PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

CBSC 2026: सीबीएसई अब 2026 से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई कॉपी जांच प्रणाली शुरू करने जा रहा है। इसका मकसद है कि कॉपी जांच और भी ज्यादा सही और तेज़ हो। पिछले कुछ सेशन्स में जब इस तकनीक को ट्रायल में इस्तेमाल किया गया, जिसके की अच्छे रिजल्ट्स मिले हैं। अब बोर्ड इसे बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है। इस नई प्रणाली में टीचर ऑनलाइन कॉपियां चेक करेंगे और AI उनका डेटा देखकर उन्हें जांचने में मदद करेगा। इससे पूरी जांच प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी, तेज़ और निष्पक्ष हो जाएगी... जाने कैसे होगा कॉपियों का चेक?


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में Artificial Intelligence (AI) आधारित मूल्यांकन और डिजिटल जांच प्रणाली का उपयोग बड़े पैमाने पर करने वाला है। इसका मकसद है कि उत्तर पुस्तकों की जांच में गलती कम हो और सही परिणाम मिलें। बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि CBSE ने पहले भी कुछ परीक्षाओं में AI की मदद से जांच करने की कोशिश की थी। उसका नतीजा अच्छा रहा, इसलिए अब बोर्ड इस डिजिटल जांच को ज्यादा जगहों पर लागू करेगा। शिक्षक अब कागज की कॉपियों की बजाय स्कैन की गई कॉपियों को ऑनलाइन देखेंगे। इस नई तकनीक से जांच में समानता आएगी और जांच का काम जल्दी होगा। दिल्ली के द्वारका में पहले ही इस तकनीक का प्रयोग हो चुका है, जहां शिक्षक ऑनलाइन जांच करना सीखेंगे। बोर्ड ने यह भी कहा है कि AI सिस्टम से शिक्षक का काम खत्म नहीं होगा। शिक्षक ही जांच करेंगे, AI सिर्फ मदद करेगा जैसे गलती पकड़ना और डेटा का विश्लेषण करना। इस तरीके से जांच का काम तेज, साफ-सुथरा और निष्पक्ष होगा।


CBSE ने पहली बार 2024-25 में AI आधारित जांच का प्रयोग किया था और तब पाया कि कई स्कूलों के अंदर मूल्यांकन में बहुत फर्क था। इसलिए बोर्ड ने स्कूलों को अपने मूल्यांकन को सही तरीके से करने के लिए निर्देश दिए थे। इससे बोर्ड को तकनीक के ज़रिए मूल्यांकन में पारदर्शिता लाने में मदद मिली है।

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