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बीआरएबीयू में सर्टिफिकेट से हिंदी हटाने पर हंगामा, प्रमोशन पर भी शुरू हुई बहस

Bihar News: बिहार के बीआरएबीयू यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट बैठक में छात्रों के सर्टिफिकेट से हिन्दी में नाम हटाने के मुद्दे पर हंगामा हुआ। साथ ही शिक्षकों के प्रमोशन और कॉलेज संबद्धता जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा हुई।

बीआरएबीयू में सर्टिफिकेट से हिंदी हटाने पर हंगामा, प्रमोशन पर भी शुरू हुई बहस
Tejpratap
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3 मिनट

Bihar News: बिहार के बीआरएबीयू यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को सिंडिकेट की बैठक में विश्वविद्यालय के सर्टिफिकेट से छात्र का नाम हिन्दी में हटाने के निर्णय को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय ने की। दोपहर दो बजे शुरू हुई बैठक साढ़े चार बजे तक चली, जिसमें कई मुद्दों पर गहन चर्चा और शोर-शराबा देखने को मिला। 


बैठक में सिंडिकेट सदस्य प्रो प्रमोद कुमार ने सर्टिफिकेट से हिन्दी में नाम हटाने का पुरजोर विरोध किया। उनके साथ सदस्य डॉ सत्येंद्र सिंह उर्फ टुनटुन और प्रो रमेश गुप्ता भी थे। प्रो प्रमोद कुमार का कहना था कि विश्वविद्यालय के सर्टिफिकेट पर अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी में भी छात्र का नाम छपना चाहिए।


इस पर परीक्षा नियंत्रक प्रो राम कुमार ने कहा कि हिन्दी में नाम छापने पर मात्रा और वर्तनी की गलतियों की आशंका रहती है। इसके चलते छात्र का नाम अंग्रेजी में ही रहना उचित है। उन्होंने यह भी बताया कि लाखों सर्टिफिकेट छापने की प्रक्रिया को देखते हुए अंग्रेजी में नाम रखना व्यावहारिक है। बावजूद इसके सदस्यों ने अपनी आपत्ति जारी रखी और इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका।


मालूम हो कि हाल ही में परीक्षा बोर्ड की बैठक में यह तय किया गया था कि विश्वविद्यालय से मिलने वाला सर्टिफिकेट केवल अंग्रेजी में ही जारी होगा।


बैठक में शिक्षकों के प्रमोशन को लेकर भी चर्चा हुई। प्रो रमेश गुप्ता ने कहा कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद कई शिक्षकों का प्रमोशन लंबित है। इस पर कुलपति ने 207 शिक्षकों के प्रमोशन को मंजूरी दे दी। साथ ही, जिन शिक्षकों की नौकरी का एक वर्ष पूरा हो चुका है और उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है, उनकी सेवा को स्थायी (कंफर्म) करने पर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहमति जताई।


सदस्य डॉ सत्येंद्र सिंह ने नए संबद्ध कॉलेजों में शिक्षकों के पद सृजन की बात उठाई। इस कारण छह कॉलेजों की संबद्धता पर पुनर्विचार करने का निर्णय लिया गया क्योंकि सभी आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं थे। कुलपति को निर्देश दिया गया कि वे स्वयं इन दस्तावेजों की जांच करें।


बैठक में अतिथि शिक्षकों के समायोजन, एक विषय में केवल एक शिक्षक वाले कॉलेजों में तबादले और ऐसे प्राचार्यों पर कार्रवाई के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने कहा कि अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच में लगे शिक्षकों की सेवा अभी कंफर्म नहीं की जाए।