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Success Story: मां की मौत और परीक्षा में फेल... फिर भी UPSC में ऑल इंडिया 14वीं रैंक लाकर बनीं IAS अधिकारी

Success Story: कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां दुख इंसान को पूरी तरह तोड़कर रख देता है, लेकिन कुछ लोग उसी दुख को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ते हैं और सफलता की नई इबारत लिखते हैं। ऐसे ही अंकिता चौधरी की कहानी है।

Success Story
सफलता की कहानी
© GOOGLE
PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Success Story:कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहां दुख इंसान को पूरी तरह तोड़कर रख देता है, लेकिन कुछ लोग उसी दुख को अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ते हैं और सफलता की नई इबारत लिखते हैं। हरियाणा के रोहतक जिले के महम कस्बे की रहने वाली अंकिता चौधरी की कहानी भी ऐसी ही प्रेरणास्पद मिसाल है, जो आज लाखों युवाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं।


दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से केमिस्ट्री में स्नातक करने के बाद अंकिता ने यूपीएससी (UPSC) की तैयारी का निर्णय लिया। यह राह आसान नहीं थी। वर्ष 2017 उनके जीवन में एक कठिन मोड़ लेकर आया। एक ओर यूपीएससी की असफलता, और दूसरी ओर मां का निधन, जिसने उन्हें भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया। यह वह पल था, जब हालात ने उनकी हिम्मत और धैर्य की असली परीक्षा ली।


इस कठिन दौर में अंकिता के पिता उनके सबसे बड़े संबल बने। उन्होंने अपनी बेटी को टूटने नहीं दिया और हर मोड़ पर हिम्मत दी। अंकिता ने खुद को संभाला और और भी अधिक दृढ़ निश्चय के साथ यूपीएससी की दोबारा तैयारी शुरू की। यह उनके साहस, अनुशासन और लगन का ही परिणाम था कि अगले ही वर्ष 2018 में उन्होंने ऑल इंडिया 14वीं रैंक हासिल की और आईएएस अधिकारी बनने का सपना साकार किया। उनके ऑप्शनल विषय के रूप में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन था।


आईएएस बनने के बाद अंकिता को सरकारी आवास, गाड़ी, ड्राइवर और अन्य सरकारी सुविधाएं तो मिली हीं, साथ ही उन्हें समाज के लिए कार्य करने और बदलाव लाने का मौका भी मिला। आज वे अपने ईमानदार प्रशासन, जनहित में लिए गए फैसलों और सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए जानी जाती हैं। वे न केवल प्रशासनिक अधिकारी हैं, बल्कि एक प्रेरणा स्त्रोत भी हैं।


अंकिता चौधरी सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहती हैं, जहां वे यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को टिप्स, रणनीति और प्रेरणा देती हैं। वे अपने अनुभव साझा कर छात्रों को बताती हैं कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि यह सफलता की शुरुआत हो सकती है, बशर्ते इंसान हार माने बिना आगे बढ़े। अंकिता चौधरी की कहानी बताती है कि अगर आप में इच्छाशक्ति, मेहनत और समय का सही प्रबंधन है, तो कोई भी बाधा आपको आपके सपनों तक पहुँचने से रोक नहीं सकती। उनका जीवन उन युवाओं के लिए एक उदाहरण है जो कठिनाइयों से जूझ रहे हैं, लेकिन आगे बढ़ने की ललक रखते हैं।

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