VAISHALI: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर प्रखंड में 13 बच्चों की मौत के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। रामपुर श्यामचंद के भगतान टोला में हुए दर्दनाक नाव हादसे के 3 दिन बाद भी इलाके के लोग जान जोखिम में डालकर जुगाड़ वाली नाव के सहारे नदी पार करने को विवश हैं।
रामपुर भट्टी के वार्ड नंबर-1 के पास ढाब क्षेत्र में ग्रामीण आज भी जुगाड़ की नावों के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। जुगाड़ टेक्नोलॉजी वाली नाव पर सफर करते तस्वीर सामने आया है। जिसमें कई बच्चे पानी में इस नाव पर सवार नजर आ रहे हैं। हैरान करने वाली यह तस्वीर है।
दरअसल, बीते मंगलवार को भगतान टोला में नाव डूबने से 13 बच्चों की मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल है। इसके बावजूद ग्रामीणों को आने-जाने के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं मिल पाया है। सरकारी नाव भी यहां नहीं चल रही हैं, मजबूरीवश लोग और बच्चे खतरनाक जुगाड़ की नावों का सहारा ले रहे हैं।
डेढ़ महीने तक पानी में घिरा रहा इलाका, फिर भी नहीं मिली सरकारी नाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान इलाके में करीब डेढ़ महीने तक पानी जमा रहा, लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से सरकारी नाव उपलब्ध नहीं कराई गई। उस समय भी ग्रामीणों को जोखिम उठाकर जुगाड़ की नावों से आवागमन करना पड़ता था। अब 13 बच्चों की मौत के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है।
13 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद भी नहीं खुली प्रशासन की नींद?
घाट की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश जताते हुए जल्द सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह काफी पुराना और घनी आबादी वाला घाट है। खेती का मौसम होने के कारण यहां लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद घाट पर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि, “क्या रामपुर जैसी कोई बड़ी घटना होने के बाद ही डीएम, सरकार या स्थानीय विधायक की नींद खुलेगी? राघोपुर में आज भी हालात ऐसे ही बने हुए हैं।
ग्रामीणों ने की सरकारी नाव और पक्के घाट की मांग
हादसे के बाद सहमे ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक संवेदनशील घाटों पर सुरक्षित सरकारी नावों का संचालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर न करना पड़े।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने इलाके में पक्के घाट या स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि स्थायी व्यवस्था होने से लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और भविष्य में ऐसे हादसों की आशंका कम होगी।
ग्रामीणों ने बताया कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यहां भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। अब देखना यह है कि 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन कब जागता है और ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा कब मिलती है।




