बिहार की जीवनदायिनी कही जाने वाली कोसी नदी एक बार फिर लोगों के लिए आफत बन गई। सुपौल जिले के सरायगढ़ प्रखंड अंतर्गत भपटियाही थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह मजदूरों से भरी एक यात्री नाव अचानक अनियंत्रित होकर नदी में पलट गई। नाव पर करीब 20 लोग सवार बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और नदी घाट चीख-पुकार से गूंज उठा।
घटना सुबह करीब 8:45 बजे चिकनी गांव स्थित बनैनिया कोसी नदी घाट पर हुई। स्थानीय लोगों और गोताखोरों की तत्परता से पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। प्रशासन का दावा है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं?
सरायगढ़ के अंचल अधिकारी (सीओ) धीरज कुमार ने बताया कि - "सुबह सूचना मिली लगभग 8:45 बजे की नाव पलटने की सूचना है। सूचना मिलते हैं तुरंत हम लोग एक्शन मोड में आए और कार्रवाई शुरू कर दी। हम लोग अभी यहां घटनास्थल पर है कुछ लोग अस्पताल में है। लगभग 4 से 5 लोग अस्पताल भेजे गए हैं।हमारी नाविक से भी बातचीत हुई है। उनके द्वारा बताया गया है कि- नाव पर जितने लोग थे वह सभी लोग सुरक्षित उसी वक्त निकल गए थे। अभी तक किसी प्रकार की कोई हताहत की सूचना नहीं है। अभी तक किसी की डेड बॉडी या लाश नहीं मिली है।"
इसके आगे CO ने कहा - "जैसा नाविक ने बताया कि नाव पर लगभग 20 लोग सवार थे। अस्पताल में यह सूचना है कि चार लोग एडमिट है। आधिकारिक सूचना मुझे अभी अस्पताल प्रबंधन से नहीं मिली है कि किसी को रेफर किया गया है या नहीं किया गया उनसे सूचना मिलने के बाद ही हम आधिकारिक जानकारी आपको इस संबंध में देंगे। एनडीआरएफ की टीम घटनास्थल पर आ रही है उनसे बातचीत हुई है।"
वहीं, जिला प्रसाशन ने कहा कि - अंचल सरायगढ़ भपटियाही अंतर्गत 36.40 स्पर के निकट आज सुबह लगभग 08:45 बजे एक नाव पलटने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना प्राप्त होते ही स्थानीय प्रशासन की टीम धीरज कुमार, (अंचलाधिकारी, सरायगढ़, भपटियाही) अच्युतानंद, (प्रखंड विकास पदाधिकारी, सरायगढ़, भपटियाही) एवं प्रजेश कुमार दुबे, (थानाध्यक्ष) तथा लदेव राम( सरायगढ़-भपटियाही) आपदा मित्रों एवं गोताखोरों की टीम के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया गया।
जिला प्रसाशन का कहना है कि - नाविक मो० तसलीम के अनुसार नाव पर लगभग 15 व्यक्ति सवार थे जो नदी पार कर घास काटने एवं मुंग तोड़ने हेतु जा रहे थे। नाव से उतरने के क्रम में नाव का संतुलन थोड़ा बिगड़ जाने के कारण कुछ लोग नाव से गिर गए। नाविक के द्वारा बताया गया कि केवल नाव का संतुलन बिगड़ा था, नाव पलटी नहीं हुई। नाविक एवं स्थानीय गोताखोरों (आपदा मित्रों) द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी यात्रियों/ सवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई है। नाव पर सवार सभी व्यक्ति पूर्णतः सुरक्षित हैं।
बहरहाल, इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिहार सरकार हर साल बाढ़ और जल परिवहन को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है। करोड़ों रुपये खर्च होने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों लोग जान जोखिम में डालकर नावों से सफर करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस नाव का पंजीकरण था? क्या क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाया गया था? क्या यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट जैसी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी? अगर नहीं, तो जिम्मेदार कौन है?
हर हादसे के बाद प्रशासन की ओर से वही पुराना बयान आता है—"जांच होगी", "रिपोर्ट मांगी गई है", "दोषियों पर कार्रवाई होगी"। लेकिन क्या कभी किसी बड़ी कार्रवाई का परिणाम जनता ने देखा है? कोसी क्षेत्र में नाव हादसे कोई नई बात नहीं हैं। हर साल कई घटनाएं होती हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को लेकर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
विडंबना देखिए कि सरकार डिजिटल बिहार, विकसित बिहार और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में लोग आज भी नदी पार करने के लिए असुरक्षित नावों पर निर्भर हैं। चुनावी मंचों से विकास के दावे किए जाते हैं, मगर कोसी के किनारे रहने वाले लोगों की जिंदगी अब भी भगवान भरोसे चल रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी घाटों पर नियमित निगरानी नहीं होती। कई नावें बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के संचालित की जाती हैं। यदि समय रहते स्थानीय गोताखोर मदद के लिए नहीं पहुंचते, तो यह हादसा और भी भयावह रूप ले सकता था। फिलहाल राहत की बात यह है कि अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यह घटना एक बार फिर प्रशासन और सरकार की तैयारियों की पोल खोलती नजर आ रही है। सवाल केवल इस नाव हादसे का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो हर साल हादसों के बाद जागती है और कुछ दिनों बाद फिर गहरी नींद में चली जाती है। कोसी की लहरों से लोग बच भी जाएं, लेकिन क्या वे सरकारी लापरवाही की लहरों से कभी बच पाएंगे?




