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शिव भक्ति का अनोखा संकल्प: हाथों के बल चलकर तय कर रहे 105 किलोमीटर का सफर, जानिए ‘बिच्छू बम’ की कहानी

Bihar News: सावन में बाबा धाम जाने वाले कांवड़ियों के बीच मुंगेर के असरगंज में दो श्रद्धालु अपनी अनोखी भक्ति के कारण चर्चा में हैं। एक डमरू आकार की कांवड़ लेकर यात्रा कर रहा है, तो दूसरा हाथों के बल कठिन कांवड़ यात्रा पूरी कर रहा...

शिव भक्ति का अनोखा संकल्प: हाथों के बल चलकर तय कर रहे 105 किलोमीटर का सफर, जानिए ‘बिच्छू बम’ की कहानी
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Ramakant kumar
5 मिनट

Bihar News: श्रावण के महीने में सुल्तानगंज से बाबाधाम तक जाने वाले कांवड़िया पथ पर इन दिनों आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं. भगवा वस्त्र पहने शिवभक्त कंधों पर कांवड़ लेकर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए करीब 105 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर रहे हैं. इसी कांवड़ यात्रा के दौरान मुंगेर के असरगंज में दो ऐसे शिवभक्त नजर आए, जिनकी भक्ति और यात्रा का तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.


एक शिवभक्त महादेव के प्रिय वाद्य यंत्र डमरू के आकार की कांवड़ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहे हैं, तो दूसरे श्रद्धालु पैरों के बजाय हाथों के बल यात्रा कर रहे हैं. अपने शरीर की खास मुद्रा के कारण उन्हें कांवड़िया पथ पर ‘बिच्छू बम’ के नाम से जाना जा रहा है.


डमरू के आकार की कांवड़ लेकर निकले अजय

असरगंज के कच्ची कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की नजर जब एक विशाल डमरू जैसी कांवड़ पर पड़ी तो लोग कुछ देर के लिए रुक गए. पास जाकर पता चला कि झारखंड के धनबाद जिले के भूली निवासी अजय विश्वकर्मा इस अनोखी कांवड़ के साथ सुल्तानगंज से बाबाधाम की यात्रा पर निकले हैं.


अजय पिछले सात वर्षों से सुल्तानगंज से पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं. इस बार उन्होंने अपनी कांवड़ को महादेव के प्रिय डमरू का स्वरूप देने का फैसला किया. इसके बाद लकड़ी और फाइबर की मदद से डमरू के आकार की कांवड़ तैयार की गई.


अजय जब इस कांवड़ को लेकर कांवड़िया पथ से गुजरते हैं तो रास्ते में श्रद्धालु उन्हें देखने के लिए रुक जाते हैं. कई लोग उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाते हैं. अजय के मुताबिक, जब लोग उनकी कांवड़ देखकर खुश होते हैं और ‘हर-हर महादेव’ का जयकारा लगाते हैं, तो उन्हें यात्रा की थकान महसूस नहीं होती.


हाथों के बल बाबाधाम की ओर बढ़ रहे ‘बिच्छू बम’

डमरू वाली कांवड़ के कुछ आगे बढ़ने पर लोगों की नजर एक और अनोखे शिवभक्त पर पड़ी. पश्चिम बंगाल के रहने वाले राजकुमार महतो पैरों के सहारे नहीं, बल्कि हाथों के बल बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं.


राजकुमार की यात्रा करने की मुद्रा बिच्छू जैसी दिखाई देती है. इसी वजह से कांवड़िया पथ पर श्रद्धालु उन्हें ‘बिच्छू बम’ कहकर बुलाते हैं. वह दोनों हाथों के सहारे आगे बढ़ते हैं और कुछ दूरी तय करने के बाद रुककर आराम करते हैं. इसके बाद दोबारा उसी तरीके से यात्रा शुरू कर देते हैं.


राजकुमार के मुताबिक, वह पिछले दो वर्षों से देश के अलग-अलग प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं. वह 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुके हैं. इसके अलावा चार धाम की यात्रा और 51 शक्तिपीठों में से 21 शक्तिपीठों की यात्रा भी कर चुके हैं. मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, तुंगनाथ, बागेश्वर धाम और चित्रकूट समेत कई धार्मिक स्थलों की यात्रा करने की बात भी उन्होंने बताई.


पिछले साल भी की थी ‘बिच्छू यात्रा’

राजकुमार ने बताया कि पिछले साल उन्होंने पहली बार सुल्तानगंज से बाबाधाम तक हाथों के बल ‘बिच्छू यात्रा’ की थी. उस यात्रा को पूरा करने में उन्हें करीब एक महीने का समय लगा था.


इस बार उनकी यात्रा का 12वां दिन है और वह असरगंज पहुंच चुके हैं. इस बार वह अकेले यात्रा कर रहे हैं और उनके साथ एक साइकिल भी है. इसी वजह से यात्रा की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन उन्होंने यात्रा जारी रखी है.


बंगाल से आने वाले कांवड़ियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की अपील

राजकुमार महतो ने कांवड़ यात्रा के दौरान बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर भी अपनी बात रखी. उनका कहना है कि बंगाल में सावन की शुरुआत बिहार और झारखंड में सावन शुरू होने से पहले हो जाती है.


ऐसे में शुरुआती दिनों में बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन उस समय भोजन और ठहरने जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं मिल पाती हैं. उन्होंने बिहार और झारखंड सरकार से बंगला सावन शुरू होते ही कांवड़ियों के लिए भोजन, ठहरने और दूसरी जरूरी सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था करने की अपील की.


सुल्तानगंज से बाबाधाम तक करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवड़िया पथ पर इन दिनों हर तरफ शिवभक्त नजर आ रहे हैं. कोई सामान्य कांवड़ लेकर चल रहा है तो कोई अपनी अलग आस्था और संकल्प के साथ यात्रा कर रहा है.


अजय विश्वकर्मा की डमरू वाली कांवड़ और राजकुमार महतो की ‘बिच्छू यात्रा’ इसी आस्था की दो अलग तस्वीरें हैं. दोनों श्रद्धालु अपने-अपने तरीके से बाबा बैद्यनाथ तक पहुंचने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं.