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Bihar Special Teacher : सुप्रीम कोर्ट में विशेष शिक्षक भर्ती पर बड़ा सवाल: क्या TET जरूरी है? बिहार सरकार से मांगा जवाब, हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें टिकीं

विशेष शिक्षक भर्ती में TET अनिवार्य है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से हलफनामा मांगा। 7,279 पदों की भर्ती और 649 अभ्यर्थियों के भविष्य पर टिकी सबकी नजर।

Bihar Special Teacher : सुप्रीम कोर्ट में विशेष शिक्षक भर्ती पर बड़ा सवाल: क्या TET जरूरी है? बिहार सरकार से मांगा जवाब, हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें टिकीं
Tejpratap
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Bihar Special Teacher :  बिहार में विशेष शिक्षक (Special Teacher) भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से स्पष्ट रूप से यह बताने को कहा है कि आखिर विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य योग्यता है या नहीं। कोर्ट ने इस मुद्दे पर बिहार सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट देश के कई राज्यों में विशेष शिक्षकों की भर्ती से जुड़ी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रहा है। ऐसे में आने वाला फैसला हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर डाल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- नियमों में TET की अनिवार्यता कहां लिखी है?

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार के भर्ती नियमों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। मामले में नियुक्त न्याय मित्र (Amicus Curiae) ने अदालत को बताया कि विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के लिए TET पास करना भी आवश्यक योग्यता है। लेकिन इस दलील पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने कड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन और नियमों में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं लिखा गया है कि विशेष शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य होगा। अदालत ने बिहार सरकार से पूछा कि आखिर किस नियम के आधार पर TET को जरूरी माना जा रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि जिन नियमों का हवाला दिया जा रहा है, वे सामान्य स्कूल शिक्षकों पर लागू होते हैं, विशेष विद्यालयों के शिक्षकों पर नहीं।

RCI की योग्यता ही होगी मान्य?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में भारतीय पुनर्वास परिषद (Rehabilitation Council of India-RCI) द्वारा निर्धारित और मान्यता प्राप्त योग्यता को ही प्राथमिकता मिलेगी।

कोर्ट ने संकेत दिया कि विशेष शिक्षा एक अलग क्षेत्र है और इसके लिए निर्धारित योग्यताओं का पालन होना चाहिए। यदि भर्ती नियमों में TET की अनिवार्यता स्पष्ट रूप से नहीं है, तो केवल उसी आधार पर अभ्यर्थियों को बाहर करना उचित नहीं माना जा सकता।यही कारण है कि अदालत ने बिहार सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

RCI ने भी TET को लेकर रखा अपना पक्ष

याचिकाकर्ता रजनीश कुमार पांडेय की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि RCI ने अपने हलफनामे में साफ कहा है कि विशेष शिक्षकों के लिए सामान्य TET पास करना अनिवार्य नहीं है। RCI का कहना है कि यदि भविष्य में TET को आवश्यक बनाया भी जाता है, तो वह सामान्य TET नहीं हो सकता। विशेष बच्चों की आवश्यकताओं, समावेशी शिक्षा और विशेष शिक्षण पद्धति को ध्यान में रखते हुए अलग प्रकार की शिक्षक पात्रता परीक्षा तैयार करनी होगी।इस दलील को भी सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया।

7,279 पदों की भर्ती पर असर

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि बिहार में विशेष शिक्षकों के 7,279 स्वीकृत पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 816 पद पहले से अनुबंध पर कार्यरत विशेष शिक्षकों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। दस्तावेज सत्यापन के दौरान कुल 788 अभ्यर्थियों की जांच की गई। इनमें से केवल 139 उम्मीदवारों के पास RCI की मान्यता के साथ-साथ TET योग्यता भी थी।वहीं 649 अभ्यर्थियों के पास TET प्रमाणपत्र नहीं था। इसी वजह से उनके नाम नियुक्ति के लिए अनुशंसित नहीं किए गए।यही विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दा बन चुका है।

हजारों अभ्यर्थियों की नजर अगली सुनवाई पर

यदि सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि विशेष शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं है, तो बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है जिनके पास RCI की मान्यता प्राप्त योग्यता है लेकिन उन्होंने TET पास नहीं किया है। दूसरी ओर, यदि अदालत सरकार के पक्ष को स्वीकार करती है, तो केवल TET योग्य अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति का लाभ मिल सकता है। इसलिए यह मामला हजारों उम्मीदवारों के भविष्य के साथ-साथ विशेष शिक्षा व्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को इस पूरे मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। उसी दिन दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में विशेष शिक्षकों की भर्ती से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई निर्धारित है। सभी की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हुई है, क्योंकि इस फैसले से न केवल बिहार बल्कि देशभर में विशेष शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियमों की दिशा तय हो सकती है।