Bihar News : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई लगातार जारी है। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल से सामने आया है, जहां भूमि विवाद से जुड़े एक मामले के निपटारे के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने वाली DCLR कंचन कुमारी झा को निगरानी की टीम ने गुरुवार सुबह रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उन्होंने विभूतिपुर निवासी एक व्यक्ति से जमीन विवाद से जुड़े मामले को सुलझाने के बदले 2 लाख रुपये नकद और एक वॉशिंग मशीन की मांग की थी।
निगरानी की टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद जाल बिछाया और शिकायतकर्ता के साथ DCLR के सरकारी आवास पर पहुंची। बताया जा रहा है कि जैसे ही 2 लाख रुपये की रिश्वत की रकम ली गई, पहले से तैयार निगरानी टीम ने कार्रवाई करते हुए कंचन कुमारी झा को दबोच लिया। इस कार्रवाई के बाद रोसड़ा में हड़कंप मच गया।
फिल्मी अंदाज में हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, विभूतिपुर निवासी मनोज कुमार महतो का जमीन विवाद से जुड़ा एक मामला DCLR कार्यालय में चल रहा था। आरोप है कि मामले के समाधान के लिए उनसे रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने इसकी जानकारी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने मामले की जांच और सत्यापन किया। आरोप सही पाए जाने के बाद कार्रवाई की योजना बनाई गई। गुरुवार सुबह शिकायतकर्ता मनोज कुमार महतो को साथ लेकर निगरानी की टीम रोसड़ा स्थित DCLR के सरकारी आवास पहुंची। टीम ने पूरी तैयारी के साथ ट्रैप बिछाया था।
बताया जा रहा है कि रिश्वत की रकम लेने के दौरान ही टीम ने DCLR को रंगेहाथ पकड़ लिया। कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि सरकारी आवास पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते निगरानी अधिकारियों ने आवास को अपने नियंत्रण में ले लिया।
सुबह 9 बजे पहुंची थी दो गाड़ियों से टीम
कंचन कुमारी झा पिछले करीब डेढ़ साल से रोसड़ा में DCLR के पद पर तैनात हैं। वह मूल रूप से मधुबनी जिले की रहने वाली बताई जा रही हैं। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे निगरानी की टीम दो गाड़ियों से उनके सरकारी आवास पहुंची थी।
टीम के पहुंचने के समय DCLR कंचन कुमारी झा सरकारी आवास पर ही मौजूद थीं। रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने के बाद अधिकारियों ने आवास की तलाशी शुरू कर दी। इस दौरान सुरक्षा और जांच को ध्यान में रखते हुए किसी भी बाहरी व्यक्ति के आवास के अंदर आने या वहां से बाहर जाने पर रोक लगा दी गई। सरकारी आवास के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी, लेकिन किसी को भी जांच स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई। निगरानी की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों के बीच दिनभर चर्चा होती रही।
घर से 13 लाख रुपये नकद मिलने की चर्चा
गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम ने DCLR के सरकारी आवास की गहन तलाशी ली। सूत्रों के अनुसार, तलाशी के दौरान करीब 13 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इस रकम को लेकर निगरानी की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
तलाशी के दौरान टीम ने जमीन विवाद से जुड़े मामलों और फैसलों की फाइलों को भी खंगाला। इसके अलावा दाखिल-खारिज और म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज, बैंक पासबुक, निवेश के कागजात और लॉकर से जुड़ी जानकारियों की भी जांच की गई। निगरानी अधिकारियों की नजर इस बात पर भी रही कि अधिकारी के पास मौजूद नकदी, संपत्ति और निवेश के स्रोत क्या हैं। जांच में मिले दस्तावेजों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
वॉशिंग मशीन की भी की गई थी मांग
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2 लाख रुपये नकद के अलावा एक वॉशिंग मशीन की भी मांग की गई थी। जमीन विवाद से जुड़े मामले के निपटारे के बदले इस कथित मांग की शिकायत निगरानी के पास पहुंची थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगरानी ने पहले शिकायत की जांच की और इसके बाद कार्रवाई की। रिश्वतखोरी के इस मामले में अब यह भी जांच की जाएगी कि क्या DCLR के स्तर पर अन्य मामलों में भी किसी तरह की अनियमितता या अवैध वसूली की शिकायतें रही हैं।
आखिर DCLR का काम क्या होता है?
DCLR यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स का पद भूमि और राजस्व प्रशासन में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अनुमंडल स्तर पर जमीन के रिकॉर्ड, राजस्व मामलों और भूमि विवादों की सुनवाई तथा उनके निपटारे में DCLR की अहम भूमिका होती है।
दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन से जुड़े मामलों में भी DCLR महत्वपूर्ण न्यायिक भूमिका निभाते हैं। यदि किसी व्यक्ति का दाखिल-खारिज आवेदन अंचल अधिकारी यानी CO द्वारा रद्द कर दिया जाता है या वह CO के फैसले से असंतुष्ट होता है, तो वह DCLR की अदालत में अपील कर सकता है।
इसके अलावा जमीन के कब्जे, बंटवारे और मालिकाना हक से जुड़े विवादों की भी सुनवाई DCLR स्तर पर की जाती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद नियमों के अनुसार मामले का समाधान करने की जिम्मेदारी होती है। DCLR, अंचल कार्यालयों के भूमि और राजस्व संबंधी कार्यों की निगरानी में भी भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस पद पर बैठे अधिकारी पर जमीन से जुड़े विवादों में निष्पक्ष और पारदर्शी फैसला करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है।
कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हलचल
रोसड़ा की DCLR की रिश्वत लेते गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मच गई है। जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं, लेकिन किसी अधिकारी का ट्रैप कार्रवाई में रंगेहाथ पकड़ा जाना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
फिलहाल निगरानी की टीम मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। आवास से बरामद नकदी और दस्तावेजों की जांच के बाद संपत्ति और निवेश के स्रोतों की भी पड़ताल की जा सकती है। DCLR कंचन कुमारी झा से पूछताछ के बाद मामले में कई और जानकारियां सामने आने की संभावना है।
अब इस पूरे मामले पर निगरानी की आधिकारिक रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। 2 लाख रुपये की रिश्वत और वॉशिंग मशीन की कथित मांग से शुरू हुआ यह मामला सरकारी आवास से भारी नकदी मिलने की चर्चा के बाद और भी बड़ा हो गया है।




