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सरकार की चेतावनी के बाद भी सड़क पर उतरे नियोजित शिक्षक, कहा - बिना शर्त मिले राज्यकर्मी का दर्जा

PATNA : बिहार में नई शिक्षक नियमावली का विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पटना में नई शिक्षा नियमावली के खिलाफ पांच हजार नियोजित शिक्षकों ने पदयात्रा निकाली। यह यात्रा पटना के गां

सरकार की चेतावनी के बाद भी सड़क पर उतरे नियोजित शिक्षक, कहा -  बिना शर्त मिले राज्यकर्मी का दर्जा
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

PATNA : बिहार में नई शिक्षक नियमावली का विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पटना में नई शिक्षा नियमावली के खिलाफ पांच हजार नियोजित शिक्षकों ने पदयात्रा निकाली। यह यात्रा पटना के गांधी मैदान से शुरू होकर डीएम कार्यालय पहुंची, जहां शिक्षकों ने आयुक्त कार्यालय में अपना ज्ञापन सौंपा।


दरअसल, नई शिक्षा नियुक्ति नियमावली के तहत अब राज्य में शिक्षक के पद के लिए बीपीएससी की परीक्षा देना अनिवार्य कर दिया गया है। लिखित परीक्षा के साथ साक्षात्कार लेने की भी तैयारी में सरकार लगी है। अब इसी को लेकर शिक्षकों के तरफ से विरोध किया जा रहा है।  उनका कहना है कि, नयी नियमावली के आने से नियोजित शिक्षकों की अनदेखी की जाएगी। 


वहीं, विरोध कर रहे शिक्षकों की मांग है कि 2023 नियमावली को बदलना होगा। समान काम का समान वेतन देना होगा। उनका कहना है कि हम लोग बीपीएससी परीक्षा देने को तैयार हैं, लेकिन 15-16 साल से हम लोग नौकरी कर रहे हैं उसका क्या? हम इतने साल काम करके फिर से परीक्षा क्यों दें? टीचरों का कहना है कि, जो शिक्षक नियमावली 2023 आई है वह पहले से पढ़ा रहे टीचरों पर लागू नहीं होना चाहिए। 


मालूम हो कि, राज्य सरकार के तरफ से यह एलान किया गया है कि 2005 से अब तक जितने नियोजित शिक्षक हैं। अगर वे बीपीएससी परीक्षा पास कर भी जाते हैं तो उनकी गणना नए शिक्षक की तरह की जाएगी। अब तक जो सेवा नियोजित शिक्षक के रूप में की है, उसे उनके सर्विस में नहीं जोड़ा जाएगा। शिक्षकों की मांग है कि सरकार नई शिक्षक नियक्ति नियमावली वापस ले, साथ ही बिना किसी शर्त नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा दे. इसी मांग को लेकर पटना सहित की शहर में शिक्षक सैकड़ों की संख्या में सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।


आपको बताते चलें कि, राज्य सरकार ने हाल ही में आंदोलन करने वाले शिक्षकों को चेतावनी देते हुए उनपर कार्रवाई के आदेश दिए थे। शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिला पदाधिकारियों को निर्देश जारी किया गया कि अगर कोई शिक्षक धरना प्रदर्शन में शामिल होता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।