ब्रेकिंग
Bihar MLC Election 2026: 'अनंत के लिए राजनीति सुरक्षा कवच है ...', नीरज कुमार का बड़ा ऐलान, छोटे सरकार पर कार्रवाई को लेकर बोले- न कोई बचा है, न कोई बचेगा! ✦Bihar MLC Election 2026: बिहार MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर! शिक्षक सीटों पर बंपर वोटिंग, स्नातक में सन्नाटा; जानिए 12 बजे तक कितना प्रतिशत हुआ मतदान ✦Bihar MLC Election 2026 : 'हम शेर दिल इंसान हैं', घर पर पुलिस रेड मामले में डॉ. संजीव कुमार बोले - सरकार डरी हुई है और सिस्टम मैनेज है!✦Bihar MLC Election 2026: मुजफ्फरपुर समाहरणालय में MLC चुनाव के दौरान समर्थकों का हंगामा, मजिस्ट्रेट से की धक्का-मुक्की✦सरकारी योजनाओं और स्मार्ट स्कूलों से बदली शिक्षा की तस्वीर, गरीब बच्चों को आगे बढ़ने का मिल रहा मौका✦Bihar MLC Election 2026: 'अनंत के लिए राजनीति सुरक्षा कवच है ...', नीरज कुमार का बड़ा ऐलान, छोटे सरकार पर कार्रवाई को लेकर बोले- न कोई बचा है, न कोई बचेगा! ✦Bihar MLC Election 2026: बिहार MLC चुनाव में बड़ा उलटफेर! शिक्षक सीटों पर बंपर वोटिंग, स्नातक में सन्नाटा; जानिए 12 बजे तक कितना प्रतिशत हुआ मतदान ✦Bihar MLC Election 2026 : 'हम शेर दिल इंसान हैं', घर पर पुलिस रेड मामले में डॉ. संजीव कुमार बोले - सरकार डरी हुई है और सिस्टम मैनेज है!✦Bihar MLC Election 2026: मुजफ्फरपुर समाहरणालय में MLC चुनाव के दौरान समर्थकों का हंगामा, मजिस्ट्रेट से की धक्का-मुक्की✦सरकारी योजनाओं और स्मार्ट स्कूलों से बदली शिक्षा की तस्वीर, गरीब बच्चों को आगे बढ़ने का मिल रहा मौका

सरकारी योजनाओं और स्मार्ट स्कूलों से बदली शिक्षा की तस्वीर, गरीब बच्चों को आगे बढ़ने का मिल रहा मौका

Bihar Education News: बिहार में आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने की कगार पर पहुंचीं बेटियों के लिए सरकारी योजनाएं नई उम्मीद बन रही हैं। साइकिल, छात्रवृत्ति, मुफ्त किताबों और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाओं से नवादा और सुपौल की छात्राओं को आगे बढ़ने...

सरकारी योजनाओं और स्मार्ट स्कूलों से बदली शिक्षा की तस्वीर, गरीब बच्चों को आगे बढ़ने का मिल रहा मौका
Ramakant kumar
4 मिनट

Bihar Education News: नवादा और सुपौल की बेटियों के लिए गरीबी पढ़ाई के रास्ते में रुकावट बन रही थी. किसी के पिता किसान हैं तो किसी के परिवार की आमदनी ऑटो चलाने से होती है. आर्थिक परेशानी के कारण 8वीं के बाद पढ़ाई छूटने की स्थिति में पहुंची बेटियों को सरकारी योजनाओं का सहारा मिला और उनकी शिक्षा का सिलसिला आगे बढ़ सका.


नवादा के प्रोजेक्ट कन्या इंटर विद्यालय की 9वीं कक्षा की छात्रा प्रिया वर्मा बताती हैं कि साइकिल और मुफ्त किताबों की सुविधा से उनके पिता पर पढ़ाई का आर्थिक बोझ कम हुआ है. स्कूल में पढ़ाई के साथ छात्राओं के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है. प्रिया के अनुसार, स्कूल में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन और फॉलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं. छात्राओं को सेनेटरी नैपकिन के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है.


सुपौल की सुप्रिया कुमारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. किसान परिवार से आने वाली सुप्रिया की पढ़ाई 8वीं कक्षा के बाद रुकने की स्थिति में थी. परिवार की आर्थिक स्थिति पढ़ाई का खर्च उठाने में मुश्किल पैदा कर रही थी. सुप्रिया ने दूसरे स्कूल में दाखिला लिया और वहां उन्हें छात्रवृत्ति, पोशाक और साइकिल योजना का लाभ मिला. स्कूल से किताबें और कॉपियां मिलने के बाद पढ़ाई का खर्च काफी कम हो गया और वह अब 12वीं की पढ़ाई कर रही हैं.


ऑटो चालक की बेटी प्रेरणा कुमारी को भी आर्थिक परेशानी के कारण पढ़ाई छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ा था. 12वीं में पहुंचने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें घर पर रहने को कहा. इसके बावजूद प्रेरणा ने पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की और सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सुविधाओं ने इसमें मदद की.


सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ किताबों तक सीमित पढ़ाई नहीं हो रही है. मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास, ई-लाइब्रेरी और आईसीटी लैब जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. इससे ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के छात्रों को आधुनिक तरीके से पढ़ाई करने का अवसर मिल रहा है.


रजौली के नोडल पदाधिकारी रंजीत कुमार के अनुसार, मॉडल स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है. इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों के साथ अन्य सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है. मोबाइल ऐप के जरिए लाइव क्लास की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे छात्र घर से भी पढ़ाई से जुड़ी अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें.


सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली इन छात्राओं के लिए साइकिल, किताबें, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं पढ़ाई जारी रखने में मददगार साबित हो रही हैं. वहीं स्मार्ट क्लास और डिजिटल सुविधाओं से उनकी पढ़ाई का तरीका भी बदल रहा है.


प्रिया, सुप्रिया और प्रेरणा जैसी छात्राएं अब पढ़ाई जारी रखते हुए अपने भविष्य को लेकर नए सपने देख रही हैं. आर्थिक परेशानी के बावजूद शिक्षा का रास्ता नहीं छोड़ने वाली इन बेटियों के लिए सरकारी स्कूल और योजनाएं पढ़ाई को आगे बढ़ाने का जरिया बन रही हैं.