ब्रेकिंग
बख्तियारपुर में शिवचर्चा की आरती के दौरान घर में लगी आग, तीन लोगों की दर्दनाक मौतसासाराम में बोलेरो-ऑटो की टक्कर: CRPF जवान की मौत, पत्नी और दो बच्चों समेत 5 घायलस्कूल के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, SDM ने प्रधानाचार्य को किया शो-कॉज, रसोइया बर्खास्तदरभंगा में दर्दनाक सड़क हादसा, स्कॉर्पियो की टक्कर से पति-पत्नी की मौत; LNMU में प्रोफेसर थीं बबीता देवीबिहार में बढ़ा नदियों का जलस्तर, अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में कटाव प्रभावित इलाकों का तेजस्वी यादव ने लिया जायजाबख्तियारपुर में शिवचर्चा की आरती के दौरान घर में लगी आग, तीन लोगों की दर्दनाक मौतसासाराम में बोलेरो-ऑटो की टक्कर: CRPF जवान की मौत, पत्नी और दो बच्चों समेत 5 घायलस्कूल के औचक निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल, SDM ने प्रधानाचार्य को किया शो-कॉज, रसोइया बर्खास्तदरभंगा में दर्दनाक सड़क हादसा, स्कॉर्पियो की टक्कर से पति-पत्नी की मौत; LNMU में प्रोफेसर थीं बबीता देवीबिहार में बढ़ा नदियों का जलस्तर, अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर में कटाव प्रभावित इलाकों का तेजस्वी यादव ने लिया जायजा

खड़ी-खड़ी कबाड़ हो गई लालू की गाड़ी! जेपी विश्वविद्यालय को दिए थे दो बस, जानिए.. बदहाली की पूरी कहानी

CHHAPRA: बिहार के स्कूल और कॉलेजों की बदहाली से हर कोई वाकिफ है। स्कूलों और कॉलेजों में संसाधनों की घोर कमी के बावजूद कुछ संसाधन उलपब्ध भी हैं तो देखरेख के अभाव में उनका हाल ब

खड़ी-खड़ी कबाड़ हो गई लालू की गाड़ी! जेपी विश्वविद्यालय को दिए थे दो बस, जानिए.. बदहाली की पूरी कहानी
Mukesh Srivastava
2 मिनट

CHHAPRA: बिहार के स्कूल और कॉलेजों की बदहाली से हर कोई वाकिफ है। स्कूलों और कॉलेजों में संसाधनों की घोर कमी के बावजूद कुछ संसाधन उलपब्ध भी हैं तो देखरेख के अभाव में उनका हाल बुरा है। इसी तरह का एक मामला छपरा से सामने आया है, जहां तत्कालीन रेलमंत्री और सारण सांसद लालू प्रसाद द्वारा छात्राओं की सुविधा के लिए जेपी विश्वविद्यालय को दिए गए दो बस बदहाली की पूरी कहानी बता रहे हैं।


दरअसल, जयप्रकाश विश्वविद्यालय परिसर में खड़ी दो पीले रंग की बसें कबाड़ बनकर बदहाली की कहानी बयां कर रही हैं। सारण के तत्कालीन सांसद और उस वक्त रेलमंत्री रहे लालू प्रसाद ने जेपी विश्वविद्यालय की छात्राओं को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से सांसद मद से दिए थे। दोनों बसें विश्वविद्यालय सहित महिला महाविद्यालय को प्रदान किया गया था ताकि छात्राएं अपने घर से जो दूर देहात में रहती हैं उन्हें आने जाने में और अपनी पढ़ाई पूरी करने में कहीं से कोई परेशानी ना हो।


विश्वविद्यालय ने बस लेने को तो ले लिए लेकिन आज तक छात्रों के लिए ये बसें सड़कों पर दौड़ते हुए नजर नहीं आईं। कुछ कॉलेजों में यह बसें असामाजिक तत्वों के द्वारा जला दी गई तो कहीं बस के पार्ट पुर्जे चोरी कर लिए गए। छात्रों का कहना है कि अगर बसें चली होती तों उन्हें विश्वविद्यालय तक आने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। प्राइवेट वाहन मनमाने ढंग से पैसे वसूलते हैं। प्रतिदिन एक सौ से डेढ़ सौ रुपया किराया में खर्च हो जाता है। अगर बसें चलती तो शायद उनका इतना पैसा बर्बाद नहीं होता और परेशानियों का सामना भी नहीं करना पड़ता।