Bihar Flood News: बिहार में गंडक नदी के उफान से कई इलाकों में बनी बाढ़ की स्थिति के बीच राहत की एक खबर सामने आई है. रेवाघाट और लालगंज में गंडक का जलस्तर अपने उच्चतम स्तर से नीचे आया है, लेकिन नदी अभी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है. तटबंधों पर पानी का दबाव कुछ कम हुआ है, फिर भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है.
रेवाघाट में 71 सेंटीमीटर और लालगंज में 32 सेंटीमीटर घटा पानी
गंडक नदी का जलस्तर रेवाघाट में अपने उच्चतम स्तर से 71 सेंटीमीटर नीचे आया है. इसके बावजूद यहां नदी का पानी खतरे के निशान से करीब 0.56 मीटर ऊपर बना हुआ है. वहीं वैशाली के लालगंज में जलस्तर 32 सेंटीमीटर घटा है, लेकिन यहां भी गंडक खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर बह रही है.
जलस्तर में कमी आने के बाद दोनों तटबंधों पर पानी का दबाव कुछ कम हुआ है. क्रिटिकल सीपेज और पाइपिंग की स्थिति में भी कमी दर्ज की गई है. हालांकि, स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है.
गंडक के बढ़े जलस्तर के बीच जहां-जहां तटबंध क्षतिग्रस्त हुए हैं, वहां कटाव रोकने और टूटे हिस्सों को सुरक्षित करने का काम जारी है. ब्रीच वाले स्थानों पर पर्याप्त सामग्री का स्टॉक किया जा रहा है. इसके साथ ही कट-एंड को प्रोटेक्ट करने और प्रभावित स्थानों की टैगिंग का काम भी किया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह की नई समस्या पर तत्काल कार्रवाई की जा सके.
सारण के कई प्रखंडों से होकर आगे बढ़ रहा बाढ़ का पानी
सारण जिले के पानापुर और मकेर प्रखंड में क्षतिग्रस्त तटबंधों से निकला पानी कई इलाकों में फैल रहा है. यह पानी पानापुर, करचौलिया, अमनौर, जगदीशपुर, मकेर और परसा के क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ रहा है. इसके बाद पानी दरियापुर प्रखंड के हरदिया चौर में जमा होगा.
हरदिया चौर से अतिरिक्त पानी के निकासी की भी व्यवस्था बताई गई है. यहां से पानी मुगल कैनाल के रास्ते गंगा नदी में और नेउरा तथा काकरा नाला के माध्यम से गंडक नदी में पहुंचेगा.
22,617 हेक्टेयर इलाके में अतिरिक्त जलप्लावन की आशंका
वर्तमान स्थिति को देखते हुए करीब 22,617 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त जलप्लावन की संभावना जताई गई है. ऐसे में गंडक के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं.
गंडक के बढ़े पानी का असर सिर्फ नदी के किनारे बसे इलाकों तक सीमित नहीं है. सारण और वैशाली के साथ आसपास के कई जिलों के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है. कहीं सड़कें डूबी हैं तो कहीं खेतों में पानी भर गया है. कई जगहों पर ग्रामीणों को आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
फिलहाल गंडक का जलस्तर कुछ नीचे आया है, लेकिन खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदी और क्षतिग्रस्त तटबंधों के कारण प्रशासन के सामने चुनौती अभी बनी हुई है. तटबंधों की निगरानी, बाढ़ के पानी की निकासी और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है.




