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स्वास्थ्य विभाग का कारनामा: एक थर्मामीटर खरीदने के लिए 1.33 करोड़ का निकाला टेंडर

सहरसा में स्वास्थ्य विभाग ने एक थर्मामीटर खरीदने के लिए 1.33 करोड़ का टेंडर जारी कर दिया। मामला सामने आने पर हड़कंप मच गया और जांच के बाद टेंडर रद्द कर दिया गया।

बिहार न्यूज
सहरसा में बड़ा टेंडर घोटाला
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

SAHARSA: बिहार में स्वास्थ्य विभाग का कारनामा सामने आया है। इस कारनामे के बारे में जानेंगे तो आप भी हैरान रह जाएंगे। दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने एक थर्मामीटर खरीदने के लिए एक करोड़ 33 लाख 78 हजार 461 रुपये का टेंडर निकाल दिया। 


स्वास्थ्य विभाग में अनियमितता और लचर व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है। अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा टेंडर व्यापक गड़बड़ी का मामला सामने आया है। विभाग ने एक थर्मामीटर खरीदने का 01 करोड़ 33 लाख 78 हजार 461 रुपये का टेंडर निकाल दिया। टेंडर की पूरी प्रक्रिया कर बीते 09 अप्रैल 2026 को हिमानी फार्मा को सप्लाई देने का वर्क आर्डर देने की बात सामने आ रही है। सबसे हैरत वाली बात है कि यह पूरी प्रक्रिया जैम पोर्टल से किया गया। जिस जैम पोर्टल को टेंडर प्रक्रिया और रेट में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया उसे भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मी से लेकर टेंडर डालने वाली विभिन्न कंपनी चकमा दे रहे हैं। 


दरअसल जनवरी माह में यह टेंडर सिविल सर्जन सहरसा कार्यालय के माध्यम से निकला। इसमें 31 जनवरी 2026 को बिड बंद होने की तारीख तय कर 31 जनवरी को खुलने का समय निर्धारित किया गया। इसका बिड संख्या जैम/2026/बी/7133177 है। एक थर्मामीटर निकालने वाले सिविल सर्जन कार्यालय के रिपोर्टिंग अधिकारी धर्मेंद्र कुमार हैं जो स्टोर इंचार्ज हैं। टेंडर निकालने के बाद कई जैम पोर्टल पर रजिस्टर्ड कई कंपनी के द्वारा टेंडर डाला गया। इसमें से कुछ कंपनी को दस्तावेज में छांट दिया गया। इसके बाद तीन कंपनी टेंडर में अंतिम तक डटे रहे। 


इसमें एल वन वाली कंपनी हिमानी फार्मा को 01 करोड़ 33 लाख 78 हजार 461 रुपये का टेंडर दे दिया गया। वहीं दूसरी एल टू में रहने वाली कंपनी शुभ लक्ष्मी इंटरप्राइजेज 01 करोड़ 34 लाख 40 हजार 278 रुपये का रहा। वहीं तीसरी कंपनी दैविक इंटरप्राइजेज एल थ्री में रहा जो 01 करोड़ 34 लाख 71 हजार 539 रुपये का एक थर्मामीटर सप्लाई के लिए टेंडर डाला था। वहीं प्राप्त जानकारी के मुताबिक एल वन में सबसे कम राशि का टेंडर डालने वाले हिमानी फार्मा को स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्क आर्डर दे दिया गया। 


स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक थर्मामीटर खरीदारी के लिए एक करोड़ से अधिक राशि का टेंडर निकालने का मामला सामने आने के बाद यह चर्चा फिर एक बार जोर पकड़ लिया है कि सरकारी विभाग में सांठगांठ पर ही टेंडर होता है। विभाग के अधिकारी और कर्मी एजेंसी के साथ मिलकर ऐसे कारनामे को अंजाम देते हैं। एक थर्मामीटर अधिक से अधिक तीन-चार हजार रुपये तक सबसे अच्छा क्वालिटी का हो जाएगा। वहीं अगर टाइपिंग गड़बड़ी ही कहा जाए तो अगर 100 थर्मामीटर ही खरीदा जाएगा तो बहुत बेहतर कंपनी और क्वालिटी का 50 हजार तक में हो जाएगा। 


अगर 1000 थर्मामीटर खरीदा जाए तो पांच लाख तक में हो जाएगा। लेकिन यहां टेंडर निकालकर उसकी पूरी प्रक्रिया पूर्ण कर लिया गया। वहीं एजेंसी भी करोड़ों का टेंडर डाल दिया। इस टेंडर घोटाले का मामला प्रमंडलीय आयुक्त तक पहुंचा। आयुक्त भी मामले के देखकर भौचक रह गए कि आखिर एक थर्मामीटर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक करोड़ से अधिक में खरीदा जा रहा है। हालांकि वह जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए इसमें निर्देश दिए हैं। 


क्या कहते हैं सिविल सर्जन?

सिविल सर्जन डॉ. राजनारायण प्रसाद कि माने तो थर्मामीटर खरीदने का टेंडर निकाला गया था। मामले में प्रमंडल आयुक्त द्वारा जांच की गई है। टेंडर को रद कर दिया गया है। इस टेंडर निकालने की अधिक जानकारी स्टोर इंचार्ज धर्मेंद्र दे सकते हैं।


क्या कहते हैं डीपीएम?

डीपीएम विनय रंजन कि माने तो थर्मामीटर खरीदारी संबंधित टेंडर की पूरी प्रक्रिया सिविल सर्जन कार्यालय से किया गया है। इसमें जिला स्वास्थ्य समिति की कोई भूमिका नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा यह टेंडर घपला-घोटाला के नियत से ही किया गया। इसका मूल कारण है कि स्वास्थ्य विभाग का राशि खर्च नहीं होने पर विभाग में वापस लौट जाती। इसे देखते हुए अधिकारी और कर्मी ने सांठगांठ कर इसका टेंडर निकाला ताकि राशि वापस नहीं हो और गुपचुप तरीके से उस राशि का बंदरबांट किया जा सके।

सहरसा से रितेश हन्नी की रिपोर्ट


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Jitendra Vidyarthi

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