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BIHAR NEWS : एडमिट कार्ड बना मजाक, कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर; जानिए क्या है पूरा मामला

बिहार के रोहतास में सिविल कोर्ट चपरासी परीक्षा के एडमिट कार्ड में हुई चौंकाने वाली गलती, रितेश कुमार की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर। पढ़ें पूरी खबर और जानें बोर्ड की प्रतिक्रिया।

BIHAR NEWS : एडमिट कार्ड बना मजाक, कैंडिडेट की फोटो की जगह छपी कुत्ते की तस्वीर; जानिए क्या है पूरा मामला
Tejpratap
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BIHAR NEWS : बिहार के रोहतास जिले से एक अजीब और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धवा गांव निवासी रितेश कुमार का एडमिट कार्ड जारी होते ही उनकी खुशियां मातम में बदल गईं। रितेश ने वर्ष 2022 में सिविल कोर्ट के चपरासी पद के लिए आवेदन किया था। लंबे इंतजार के बाद जैसे ही परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड किया, उन्होंने देखा कि कार्ड में उनकी फोटो की जगह कुत्ते की तस्वीर छाप दी गई थी।


रितेश ने बताया कि उनके नाम और अन्य विवरण सही थे, लेकिन फोटो पूरी तरह से गलत थी। उन्होंने इस गलती को बोर्ड की ओर से की गई बड़ी चूक बताया और तुरंत संबंधित विभाग को शिकायत भेज दी। उनका कहना है कि यह त्रुटि समय पर सुधार नहीं हुई तो उन्हें 15 मार्च को होने वाली परीक्षा, जिसका सेंटर सहरसा में है, में परेशानी हो सकती है।


रितेश का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन और भर्ती प्रक्रिया में ऐसी गलतियां बार-बार सामने आ रही हैं। इससे न सिर्फ अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ती है, बल्कि बिहार में सरकारी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने बोर्ड से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द इस गलती को ठीक किया जाए, ताकि परीक्षा में कोई समस्या न आए।


बिहार में पहले भी कई ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं। जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र और निवास प्रमाण-पत्र में अक्सर गलतियां सामने आती रही हैं। अब एडमिट कार्ड में ऐसी गंभीर गलती सामने आने से बिहार प्रशासन की किरकिरी हो रही है।


विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में सुधार की बेहद जरूरत है। तकनीकी त्रुटियों के कारण अभ्यर्थियों को मानसिक और शैक्षणिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। रितेश कुमार जैसे कई अभ्यर्थी इस समय चिंता में हैं, क्योंकि समय कम है और परीक्षा नजदीक है।


बोर्ड की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस गलती को सुधारता है, ताकि रितेश और अन्य अभ्यर्थियों को परीक्षा में कोई बाधा न आए।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ऑनलाइन भर्ती प्रणाली में मानवीय और तकनीकी दोनों प्रकार की सावधानी बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सुधार न किया गया, तो यह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर परेशानी खड़ी करेगा, बल्कि सरकारी प्रणाली की छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है।


इस पूरे मामले से यह साफ है कि प्रत्येक विभाग को अपने तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी, ताकि भविष्य में ऐसे हास्यास्पद और चिंता पैदा करने वाले मामले न सामने आएं।