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अग्निवीर योजना पर फिर बरसे पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह, बोले- यह सही फैसला नहीं..PM मोदी को लिखेंगे चिट्ठी

सुपौल के किशनपुर में पूर्व सैनिक सम्मान समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने अग्निवीर योजना को गलत फैसला बताया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखेंगे। आरके सिंह ने आर्थिक शक्ति से ज्यादा सैन्य शक्ति को जरूरी

बिहार न्यूज
भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा: RK SINGH
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
7 मिनट

SUPAUL: बिहार के सुपौल जिले के किशनपुर में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मान समारोह में पहुंचे भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव सह पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व आईएएस अधिकारी राज कुमार सिंह (आरके सिंह) ने देश की सैन्य शक्ति, अग्निवीर योजना और भ्रष्टाचार को लेकर बेबाक बयान देकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। 


उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी देश के लिए आर्थिक शक्ति से ज्यादा जरूरी उसकी सैन्य शक्ति है। देश को आर्थिक रूप से मजबूत जरूर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सामरिक शक्ति ही सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। जब हमारी सेना सशक्त होगी, तभी हम सही मायने में भारत को समृद्ध बना पाएंगे। 


आदर्श मिडिल स्कूल, अभुआर, किशनपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए आरके सिंह ने भ्रष्टाचार पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, "अब मैं एक आजाद देश का आजाद नागरिक हूं और आजाद नागरिक के तौर पर यह बात कह रहा हूं कि देश में भ्रष्टाचार है और यह शर्म की बात है। ऊपर बैठे लोगों की यह जिम्मेदारी है कि वे इसे खत्म करें। 


भ्रष्टाचार जहां भी है,वह दीमक की तरह है और देश का खून चूस रहा है। इसे हम सभी को मिलकर सुधारना होगा। अपने देश और प्रदेश को सुधारना होगा।" उन्होंने पूर्व सैनिकों से आह्वान किया कि जिस तरह उन्होंने देश की सीमा पर अपनी जान की बाजी लगाकर राष्ट्र की रक्षा की,उसी तरह अब समाज और व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि सैनिकों ने देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। अब हम सभी को मिलकर अपने देश और प्रदेश को सुधारने की जिम्मेदारी उठानी होगी।


अग्निवीर योजना पर फिर बरसे आरके सिंह,बोले- सही निर्णय नहीं हुआ

समारोह में आरके सिंह ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को लेकर भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि अग्निवीर को लेकर लिया गया फैसला सही निर्णय नहीं था। इस मुद्दे पर वह पहले भी अपनी बात रख चुके हैं और लिख चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह एक बार फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। उन्होंने अग्निवीर योजना लागू किए जाने के पीछे पेंशन और अन्य खर्चों का तर्क दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि पहले देश की सैन्य ताकत और रक्षा बजट को लेकर एक अलग सोच थी। एक समय ऐसी धारणा थी कि दुनिया को यह पता नहीं चलना चाहिए कि भारत अपनी सैन्य शक्ति पर कितना खर्च करता है। उस दौर में विभिन्न संस्थाएं चीन,पाकिस्तान के रक्षा बजट की तुलना करती थीं और सैन्य खर्च को लेकर चर्चा होती थी। लेकिन आज इस विषय पर पहले जैसी गंभीरता दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि देश को अपने सैनिकों का सम्मान करना चाहिए। अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने के बाद उन्हें सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और अन्य सेवाओं में समायोजित करने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया जो बिल्कुल गलत है लेकिन कोई देश उस पर कुछ नहीं बोलता क्योंकि वह सामरिक और सैन्य दोनों दृष्टिकोण से मजबूत है।


पूर्व सैनिकों को सम्मान,सुविधा और अधिकार दिलाने के लिए जुटे दिग्गज

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पूर्व सैनिकों को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना और उन्हें चिकित्सा सुविधा, पेंशन, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना रहा। साथ ही पूर्व सैनिकों के बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार में नियमानुसार प्राथमिकता दिलाने तथा सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आवश्यक सामाजिक और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में सार्थक पहल करना भी कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य रहा।

वक्ताओं ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा में अपना अमूल्य जीवन समर्पित करने वाले सैनिकों का सम्मान महज औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरे समाज का नैतिक दायित्व है। सैनिकों ने अपने साहस, अनुशासन और त्याग से राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित की है। इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद भी उनके सम्मान, सुरक्षा, सुविधाओं और समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। कार्यक्रम के माध्यम से पूर्व सैनिकों के बीच एकजुटता बढ़ाने, उनकी समस्याओं को उचित मंच देने तथा समाज और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का संदेश दिया गया।


सांसद दिलेश्वर कामत ने दिया जमीन और हरसंभव सहयोग का आश्वासन.

कार्यक्रम में मौजूद सुपौल के सांसद दिलेश्वर कामत ने पूर्व सैनिकों की ओर से रखी गई मांगों पर हरसंभव पहल करने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों के लिए जितनी भी जमीन की जरूरत होगी, उसे उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। सांसद ने उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के सहयोग से सुपौल जिले में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने रेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि आगे भी जिले में आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए और अधिक काम किए जाएंगे।


सड़क और बिजली के विकास कार्यों में आरके सिंह की भूमिका की हुई चर्चा.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पूर्व केंद्रीय ऊर्जा मंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव आरके सिंह ने केंद्र सरकार की ओर से किए गए विकास कार्यों और उनके कार्यान्वयन के अनुभवों को विस्तार से साझा किया। खासकर सुपौल जिले में सड़क और बिजली से जुड़े संसाधनों के विकास को गति देने में अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में सैन्य आधुनिकीकरण को गति मिली है और आधुनिक संसाधनों से सेना को सशक्त बनाना समय की जरूरत है। आर्थिक विकास के साथ-साथ सामरिक शक्ति को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।


किशनपुर के अभुआर स्थित आदर्श मिडिल स्कूल में आयोजित यह सम्मेलन सिर्फ पूर्व सैनिकों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसमें सैनिकों की समस्याओं, सरकारी सुविधाओं,रोजगार,चिकित्सा,जमीन आवंटन और प्रशासनिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। आरके सिंह के अग्निवीर योजना और भ्रष्टाचार पर दिए गए बेबाक बयान ने कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। सम्मेलन के जरिए यह संदेश दिया गया कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद भी सम्मान, अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

रिपोर्टिंग
S

रिपोर्टर

SANT SAROJ

FirstBihar संवाददाता