1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 06, 2026, 10:33:07 AM
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BIHAR NEWS : बिहार के पूर्वी चंपारण से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने न सिर्फ प्रशासन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि जब सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोलता है, तो कानून कितनी आसानी से पैरों तले कुचला जा सकता है।
पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल प्रखंड अंतर्गत चैता गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक सरकारी अधिकारी खुद ही कानून तोड़ता नजर आया। कृषि विभाग में तैनात अधिकारी प्रकाश सिंह उर्फ शंकु पर आरोप है कि उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर गांव के ही सुजीत कुमार सिंह के घर पर धावा बोल दिया।
घटना का जो वीडियो सामने आया है, वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता—लेकिन यह हकीकत है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्रकाश सिंह और उसके साथ मौजूद कुछ लोग हाथों में रिवॉल्वर लहराते हुए घर के बाहर खड़े हैं। माहौल इतना डरावना था कि आसपास के लोग अपने-अपने घरों में दुबक गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी सिर्फ धमकी देने नहीं आए थे, बल्कि उन्होंने खुलेआम दरवाजे पर फायरिंग भी की। गोलियों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। लोग सहम गए, बच्चे रोने लगे और महिलाएं डर के मारे घरों में छिप गईं।
पीड़ित सुजीत कुमार सिंह और उनके परिवार का आरोप है कि हमलावरों ने न सिर्फ जान से मारने की धमकी दी, बल्कि पुलिस का नाम लेकर भी डराने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि आरोपी ने कहा कि “पुलिस हमारी जेब में है, शिकायत करोगे तो तुम्हें ही फंसा देंगे।”
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अब सरकारी पद पर बैठे लोग ही कानून से ऊपर हो गए हैं? एक लोक सेवक का इस तरह खुलेआम हथियार लहराना और फायरिंग करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की नाकामी को भी उजागर करता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना का वीडियो सामने आने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह स्थिति पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाती है। क्या प्रभाव और दबाव के कारण कार्रवाई में देरी हो रही है?
पीड़ित परिवार इस घटना के बाद पूरी तरह डरा हुआ है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी जान का खतरा है। परिवार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उनके साथ कोई भी अनहोनी होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर प्रकाश सिंह और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।
गांव के लोगों में भी इस घटना को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर एक अधिकारी ही गुंडागर्दी पर उतर आएगा, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करेगा?यह घटना सिर्फ एक गांव या एक परिवार की नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है। अगर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है, ताकतवरों के लिए नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी दबाव और प्रभाव की भेंट चढ़ जाएगा?