Bihar police : पुलिस की वर्दी का नाम आते ही आम लोगों के जेहन में कानून, अनुशासन और सुरक्षा की तस्वीर उभरती है। लेकिन पूर्णिया से सामने आए एक शिकायत पत्र ने इसी तस्वीर पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत में एक महिला पुलिसकर्मी ने मरंगा थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष कौशल कुमार यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के मुताबिक, महिला पुलिसकर्मी पूर्णिया जिले में तैनात रही हैं और इससे पहले भी पूर्णिया में अपनी सेवा दे चुकी हैं। आरोप है कि इसी दौरान थानाध्यक्ष कौशल कुमार यादव की ओर से उन्हें निजी मुलाकात, बातचीत और कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए परेशान किया गया। महिला का दावा है कि शुरुआत में बातचीत को सामान्य रखने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में कथित दबाव बढ़ता गया।
अब सवाल यह है कि जिस वर्दी पर कानून की मर्यादा कायम रखने की जिम्मेदारी है, अगर उसी वर्दी के पीछे से किसी महिला कर्मचारी को दबाव महसूस होने लगे तो शिकायत आखिर कहां जाएगी?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला पुलिसकर्मी को देर रात व्हाट्सऐप पर चैट और संदेश भेजे जाते थे। कथित तौर पर निजी तस्वीरों और वीडियो से संबंधित धमकी भी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे डर था कि निजी तस्वीरों को सार्वजनिक कर उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। इसी डर के कारण वह कई बार दबाव में बातचीत करती रही।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारी ने कथित तौर पर महिला को अपने प्रभाव में लेने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कभी बातचीत का दबाव, कभी मुलाकात का आग्रह और कभी कथित धमकी—शिकायत में घटनाओं का ऐसा ही सिलसिला बताया गया है।
यानी कहानी में कानून की किताब पीछे और व्हाट्सऐप चैट आगे दिखाई देने का आरोप है। हालांकि असलियत क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
शिकायत में एक और गंभीर बात कही गई है। महिला ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी पर पहले भी कुछ महिला पुलिसकर्मियों को परेशान करने या अपने प्रभाव में लेने की चर्चाएं रही हैं। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि कुछ अन्य महिला पुलिसकर्मी भी कथित तौर पर उनके संपर्क में थीं। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेज से नहीं होती है।
यहां सबसे बड़ा सवाल पुलिस व्यवस्था के अंदर कार्यस्थल की सुरक्षा और शिकायत तंत्र को लेकर खड़ा होता है। अगर कोई महिला पुलिसकर्मी अपने ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ शिकायत करती है, तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कैसे होगी? क्या उसे बिना दबाव अपनी बात रखने का माहौल मिलेगा? और अगर आरोप गलत हैं, तो आरोपी अधिकारी की प्रतिष्ठा की रक्षा कौन करेगा?
यही वजह है कि ऐसे मामलों में आरोपों को सनसनी की तरह पेश करने के बजाय निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो जाती है। शिकायत पत्र में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करते। जांच एजेंसी को शिकायतकर्ता के बयान, कथित चैट, फोटो-वीडियो, कॉल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करनी होगी।
वर्दी चाहे पुरुष की हो या महिला की, कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। अगर किसी अधिकारी ने पद का दुरुपयोग किया है तो कार्रवाई होनी चाहिए और अगर आरोप निराधार साबित होते हैं तो संबंधित अधिकारी को भी न्याय मिलना चाहिए।
आखिर पुलिस विभाग की असली ताकत सिर्फ डंडे या वर्दी में नहीं, बल्कि उस भरोसे में है जो जनता और विभाग के अपने कर्मचारियों को कानून-व्यवस्था पर होता है। इसलिए पूर्णिया के इस मामले में सबसे जरूरी चीज है—न तंज, न दबाव, न पर्दा; सिर्फ निष्पक्ष जांच और सच सामने लाने की प्रक्रिया।





