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बिहार में PHD धारकों के आंदोलन को मिली बड़ी सफलता, राज्यपाल से वार्ता के बाद अनशन खत्म

बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली 2026 को लेकर 21 दिनों से चल रहे पीएचडी धारकों के अनशन के बाद राज्यपाल से वार्ता में कई मांगों पर सहमति बनी। 15 दिनों में विशेषज्ञ समिति गठित होगी और नियमावली में संशोधन तक इसके आधार पर भर्ती स्थगित रहेगी।

बिहार न्यूज
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
7 मिनट

PATNA: बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली, 2026 को लेकर चल रहे पीएचडी धारकों के आंदोलन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ऑल पीएच.डी. होल्डर्स एण्ड रिसर्च एसोसिएशन के बैनर तले गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से करीब दो घंटे तक बातचीत हुई। वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी है। 


खत्म होगा अनशन

राज्यपाल के साथ हुई बातचीत के बाद अनशनकारी छात्रों ने अपना अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली में संशोधन, भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा और API की भूमिका, पीएचडी धारकों को मिलने वाले अधिमानता अंक, अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा शर्तों सहित कई मुद्दे राज्यपाल के सामने रखे।


नई नियमावली के आधार पर फिलहाल भर्ती नहीं

राज्यपाल से हुई वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण सहमति सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम, 2026 को लेकर बनी। तय किया गया कि एसोसिएशन की मुख्य मांगों पर विचार करने और आवश्यक संशोधन किए जाने के बाद ही इस नियमावली के आधार पर सहायक प्राध्यापकों की किसी भी प्रकार की नियमित अथवा संविदा बहाली की जाएगी। तब तक वर्ष 2026 के इस परिनियम को स्थगित रखने पर सहमति बनी है। इससे आंदोलन कर रहे पीएचडी धारकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


15 दिनों के भीतर बनेगी विशेषज्ञ समिति

एसोसिएशन की मांगों पर व्यापक विचार के लिए एक विशेष समिति गठित करने पर भी सहमति बनी है। जानकारी के मुताबिक, राज्यपाल, बिहार मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद 15 दिनों के अंदर समिति का गठन करेंगे। इस समिति में बिहार के प्रमुख शिक्षाविदों के साथ ऐसे प्रशासकों को भी शामिल किया जाएगा, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का अनुभव हो। समिति सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया और उससे जुड़े विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा करेगी तथा आवश्यक बदलावों को लेकर सुझाव देगी।


 अधिकतम उम्र 55 वर्ष करने की मांग

समिति के समक्ष जिन प्रमुख मांगों पर विचार किया जाएगा, उनमें सहायक प्राध्यापक पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष किए जाने की मांग भी शामिल है। एसोसिएशन का तर्क है कि पीएचडी, शोध और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लंबा समय लगाने वाले अभ्यर्थियों को भर्ती के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। इसी को देखते हुए अधिकतम उम्र सीमा बढ़ाने की मांग की गई है।


लिखित परीक्षा में ऑब्जेक्टिव पैटर्न की मांग

सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया है। एसोसिएशन की मांग है कि भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की जाए, लेकिन परीक्षा ऑब्जेक्टिव यानी वस्तुनिष्ठ प्रकार की हो।


प्रस्ताव के अनुसार लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के API यानी Academic Performance Indicator की गणना की जाएगी। इसके बाद लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों और API स्कोर को जोड़कर एक समेकित मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। इसी मेरिट के आधार पर निर्धारित संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।


इंटरव्यू में होगा टीचिंग डेमो

भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी बनाने के लिए इंटरव्यू के दौरान टीचिंग डेमो शामिल करने की मांग पर भी चर्चा हुई है। इसका उद्देश्य केवल लिखित परीक्षा या शोध उपलब्धियों के आधार पर अभ्यर्थी का मूल्यांकन करने के बजाय उसकी वास्तविक शिक्षण क्षमता का भी आकलन करना है।


मैट्रिक और इंटर के अंक API में नहीं जुड़ेंगे

API की गणना को लेकर भी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। एसोसिएशन की मांग है कि API की गणना में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्राप्तांकों को शामिल नहीं किया जाए। वहीं NET और JRF को मिलने वाले अधिमानता अंकों को अधिकतम 11 तक रखने का प्रस्ताव है। दूसरी ओर पीएचडी की अधिमानता को 30 से कम नहीं करने की मांग की गई है। इस मुद्दे पर समिति द्वारा विचार करने का आश्वासन दिया गया है।


शोध प्रकाशन और अनुभव को भी मिलेगा महत्व

API स्कोर में शोध प्रकाशन और अनुभव को शामिल करने की मांग भी उठाई गई है। हालांकि इसके साथ यह भी कहा गया है कि शोध प्रकाशन और अनुभव की स्पष्ट एवं विस्तृत परिभाषा तय की जानी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भर्ती प्रक्रिया में शोध और अनुभव का लाभ वास्तविक रूप से योग्य अभ्यर्थियों को मिले और नियमों में किसी प्रकार की अस्पष्टता का गलत फायदा न उठाया जा सके।


अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मुद्दे पर भी चर्चा

वार्ता के दौरान अतिथि सहायक प्राध्यापकों की सेवा शर्तों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। अनशनकारी छात्रों की मांग है कि अतिथि सहायक प्राध्यापकों को भी वर्तमान में बहाल किए गए संविदा सहायक प्राध्यापकों की तरह न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता दिया जाए। इसके अलावा अतिथि सहायक प्राध्यापकों के नवीकरण की प्रक्रिया को सभी विश्वविद्यालयों में एक समान रखने की मांग की गई है।


65 वर्ष तक काम का अवसर

अतिथि सहायक प्राध्यापकों के मामले में एक और महत्वपूर्ण सुझाव रखा गया है। इसके तहत उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र और अनुभव की उचित तरीके से जांच किए जाने के बाद उन्हें 65 वर्ष की उम्र तक कार्य करने का अवसर दिए जाने की मांग पर समिति विचार करेगी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य योग्य और अनुभवी अतिथि शिक्षकों को लंबे समय तक शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर रखने से संबंधित है।


उम्र सीमा धीरे-धीरे घटाने का सुझाव

अनशनकारी छात्रों की ओर से अधिकतम उम्र सीमा में अचानक बदलाव के बजाय उसे क्रमिक रूप से कम करने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही इस संक्रमण अवधि में सहायक प्राध्यापकों की बहाली हर वर्ष नियमित रूप से उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध किए जाने की मांग रखी गई है। इससे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को अवसर मिलने की संभावना बढ़ सकती है।


21 दिनों के आंदोलन के बाद बनी सहमति

ॉगर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से चल रहे अनशन के बाद राज्यपाल के साथ हुई करीब दो घंटे की वार्ता को आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों और भर्ती नियमावली से जुड़ी आपत्तियों को विस्तार से राज्यपाल के समक्ष रखा। वार्ता के बाद समिति के गठन, 2026 के भर्ती परिनियम में आवश्यक संशोधन तक उसके आधार पर भर्ती पर रोक तथा विभिन्न मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद अनशनकारी छात्रों ने अपना अनशन वापस लेने की बात कही है।


अब इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम 15 दिनों के भीतर प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति का गठन और उसके बाद सहायक प्राध्यापक भर्ती नियमावली में संभावित संशोधन होगा। समिति की सिफारिशों और सरकार के अगले फैसले पर बड़ी संख्या में पीएचडी धारकों और उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।

ब्यूरों रिपोर्ट फर्स्ट बिहार